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️ऑनलाइन,विस्तारFollow Usजिले के देईखेड़ा थाना क्षेत्र की बाढ़ग्रस्त पंचायत रेबारपुरा के पंचायत सचिव से मारपीट के मामले में फरार मुख्य आरोपियों को पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। आमजन में आरोपियों का खौफ खत्म करने के लिए देईखेड़ा पुलिस ने उन्हें सुरक्षा घेरे में कस्बे के मुख्य बाजार से हाथ जकड़कर पैदल घुमाया।
विस्तारFollow Usबिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को विधानसभा चुनाव 2025 के बाद पहली बार भागलपुर पहुंचे। वे यहां भीखनपुर स्थित अपने करीबी मित्र उदय कांत मिश्रा के आवास पर उनकी माता के श्राद्ध कर्म में शामिल हुए तथा परिजनों से मिलकर संवेदना व्यक्त की।
डायमंड डाउनलोड, शहाबगंज। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन शहाबगंज में तैनात ब्लॉक मिशन मैनेजर अब्दुल कादिर पर पांच लाख के गबन के आरोप में विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है।
विस्तारFollow Usबदायूं जिले में किसानों ने खेतों के चारों ओर तारबंदी की हुई है, कुछ ने तो अपने खेत की मेड़ों पर लोहे के टिनशेड भी लगा रखे हैं, बावजूद इसके छुट्टा पशु इन्हें तोड़कर खेतों में घुस फसल नष्ट कर जा रहे हैं। मजबूरी में किसानों को भीषण सर्दी में खेतों में घूमकर और मचानों पर जागकर पहरा देना पड़ रहा है। खेत की रखवाली के दौरान छुट्टा पशु हमलावर भी हो जाते हैं, ऐसे में उन्हें अपनी जान का भी खतरा रहता है।
छतारी। क्षेत्र के अल्लिपुरा गांव में खुरपका-मुंहपका बीमारी का प्रकोप फैल रहा है। गांव में बीते दस दिनों में आठ पशुओं की मौत हो चुकी है। ऐसे में पशु पालक काफी भयभीत हैं। वहीं, पशु विभाग की ओर से गांव में टीकाकरण शुरू कर दिया गया है।
सारजिले के देईखेड़ा थाना क्षेत्र में नाबालिग चचेरे भाई ने जंगल में बकरियां चराने गई अपनी ही नाबालिग बहन के साथ दरिंदगी की। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मोबाइल, जिला अस्पताल में वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई विशेष ओपीडी। स्रोत: विभाग
अतिरिक्त पैसे अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुरPublished by:राहुल तिवारीUpdated Mon, 29 Dec 2025 03:25 PM IST
Tariff Threatईरान में कितना बड़ा हुआ आंदोलन?BangladeshTOP NewsUttarakhandUSUPReal Madridकपसाड़ कांडआज के दिन
शेयर, चंपावत। कभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।







