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️पुराना रजिस्टर,सारबेमेतरा पुलिस ने आज गुरुवार को आत्महत्या के प्रकरण में पति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पति ने अपनी पत्नी से मारपीट किया था। इससे नाराज पत्नी ने खुद पर आग लगाकर की आत्महत्या कर ली थी।
अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Mon, 22 Dec 2025 01:13 PM IST
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सारईरान में जो प्रदर्शनों का दौर जारी है, उसकी शुरुआत कहां से हुई और इसकी वजह क्या थी? दो हफ्ते में ईरान में ऐसा क्या-क्या हुआ है, जिससे प्रदर्शनों में सत्ता परिवर्तन की मांग उठने लगी है? इस आंदोलन के पीछे का चेहरा कौन है? यह प्रदर्शन कितने बड़े स्तर पर हैं? ईरान सरकार ने इनसे निपटने के लिए क्या किया है? इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रतिक्रिया रही है? अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के आंदोलनों को लेकर क्या तैयारी कर रहे हैं?आइये जानते हैं...
बिहार में हाड़ कंपाने वाली ठंड ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। साल के आखिरी दिन कई जिलों में घना कोहरा है। लोग अपने घर में ही कैद हैं।पटना के स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं।राज्य का न्यूनतम तापमान पांच डिग्री (गया) तक पहुंच गया है। पटना में कई दिनों बाद आज सुबह धूप निकली लेकिन फिर भी न्यूनतम तापमान आज सुबह नौ डिग्री दर्ज किया गया है। एक जनवरी तक बिहार के 25 जिलों में शीत दिवस (कोल्ड डे) का ऑरेंट अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 33 जिलों में घना कुहासा का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बिहार के पांच जिलों का तापमान सात डिग्री से भी कम दर्ज किया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 31 जनवरी की सुबह गया का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। भागलपुर (सबौर) का 5.6 डिग्री सेल्सियस, नालंदा (राजगीर) का 5.8 डिग्री सेल्सियस, सारण (छपरा) का 6.3 डिग्री सेल्सियस, औरंगाबाद का 6.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। यह इस सीजन का सबसे कम तापमान है। यानी इस सीजन में पहली बार इतनी ठंड पड़ी है।
EOW ने मांगा अनवर ढेबर और केके श्रीवास्तव का प्रोडक्शन वारंट- फोटो : अमर उजाला
इंस्टेंट कम्पलीट, राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहा इंडो–यूके संयुक्त सैन्य अभ्यास अजेय वॉरियर–25 उच्च पेशेवर स्तर पर आगे बढ़ रहा है। भारतीय सेना की सिख रेजिमेंट और यूके आर्मी का दल एक संयुक्त राष्ट्र जनादेश के तहत इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के लिए केंद्रित प्रशिक्षण गतिविधियां कर रहा है।
साइन अप ईज़ी
कभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।
विशेष वॉच, कमेंटकमेंटX😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त







