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💢ट्रांसफर💢न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाटPublished by:बालाघाट ब्यूरोUpdated Fri, 07 Nov 2025 10:30 PM IST

️मेगा रिवॉर्ड्स,अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतराPublished by:अनुज कुमारUpdated Mon, 12 Jan 2026 07:11 PM IST

Donald TrumpIranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीT20 WCRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिWest Bengal

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हादसे के बाद बाइक के उड़े परखच्चे- फोटो : अमर उजाला

विस्तारFollow Usबागेश्वर जिले के कपकोट में गैरखेत-लखमारा के लिए बन रही सड़क का निर्माण कार्य तीन साल से अधर में लटका है। ग्रामीण लंबे समय से काम शुरू करवाने की मांग कर रहे हैं। शासन-प्रशासन की ओर से सुध नहीं लिए जाने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने विधायक सुरेश गढि़या के कार्यालय के आगे सड़क पर धरना दिया। विधायक का घेराव कर एक महीने में काम शुरू करवाने की मांग की।

लॉग इन शेयर, जिले के किरनापुर विकासखंड स्थित शासकीय प्राथमिक शाला मेंढरा में बच्चों को पत्तों में मध्यान्ह भोजन परोसने के मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर मृणाल मीणा ने स्कूल के प्रभारी प्रधानपाठक सूर्यकांत कालबेले को शासकीय कर्तव्यों में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता का दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय शासकीय प्राथमिक शाला छतरपुर, विकासखंड बैहर निर्धारित किया गया है।

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विस्तारFollow UsITM:आज भारत वर्ष 2047 का रोडमैप लेकर चल रहा है। सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के लिए जरूरी है कि हम अपने परम्परागत दृष्टिकोण में बदलाव करते हुए आधुनिक तकनीक और नवाचार को अपने जीवन में सम्मलित करें ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें। देहरादून स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (आईटीएम) अपने छात्रों को नवाचार और कौशल विकास के माध्यम से डायनामिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

क्लिक विन, गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।

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