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️पॉइंट्स लाइक,कर्णप्रयाग। 14 जनवरी मकर संक्रांति के पावन पर्व पर कपीरी पट्टी के पौराणिक श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर किमोली में श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से भेंट की गई 101 किलो की घंटी को मंदिर परिसर स्थापित किया जाएगा। श्री लक्ष्मी-नारायण मंदिर समिति किमोली के सचिव सुरेंद्र सिंह रावत और युवा तेजेंद्र रावत ने बताया कि धार्मिक आयोजन में बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, सदस्य राजेंद्र प्रसाद डिमरी और मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल आदि मौजूद रहेंगे। संवाद
कम्पलीट विन, सारमुंगेर जिले के वासुदेवपुर थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश को लेकर दबंगों ने हथियार के बल पर तीन युवकों से मारपीट की। घटना में एक युवक का हाथ और पैर टूट गया, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। चलिए बता रहे हैं कि इस विवाद की वजह क्या थी?
चहनिया। बलुआ थाना क्षेत्र के चहनिया कस्बा में ऑटो पकड़ने आई महिला को बदमाशों ने पहले गिरा हुआ नोट दिखाकर झांसा देने की कोशिश की। इस दौरान महिला बदमाशों के झांसे में नहीं आई। इसके बाद महिला जब ऑटो में बैठी तो बदमाशों ने उन्हें चोरों के सक्रिय होने की बात कहते हुए सभी आभूषणों को पर्स में रखने की सलाह दी। इस दौरान महिला जब अपने आभूषणों को पर्स में रखने लगी तभी बदमाश उनसे आभूषण छीनकर भाग गए। शुक्रवार की सुबह महिला ने थाने आकर तहरीर दी। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है।
विस्तारFollow Usबिहार में ठंड का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। पूरे बिहार में हाड़ कंपाने वाली ठंड ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। भागलपुर, गया, नालंदा, सीवान, समस्तीपुर समेत कई जिलों में तेजी से पारा गिरा है। इन जिलों का तापमान गिरकर पांच डिग्री तक पहुंच गया। भागलपुर के सबौर का न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। आज सुबह पटना, पूर्णिया समेत कुछ जिलों में धूप जरूर निकली लेकिन सर्द हवा के कारण लोग धूप में निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इधर, पश्चिम चंपारण, गया समेत कुछ जिले घने कोहरे की चादर में लिपट चुके हैं।
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विथड्रॉ कलेक्ट विस्तारFollow Usभरतपुर शहर में एक 60 वर्षीय महिला की तबीयत खांसी की सिरप पीने के बाद अचानक बिगड़ गई। महिला को उल्टियां होने लगीं और तबीयत अधिक खराब होने पर परिजनों ने उसे जिला आरबीएम अस्पताल में भर्ती कराया, जहां फिलहाल उसकी हालत में सुधार है।
लॉग इन कम्पलीट, विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।







