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💢ऑनलाइन💢विधायक रविन्द्र भाटी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र- फोटो : अमर उजाला
️लॉग इन पॉइंट्स,विस्तारFollow Usइक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय अक्सर निवेशक धर्मसंकट में फंस जाते हैं। उन्हें लार्ज-कैप फंड्स की स्थिरता चुननी चाहिए, मिड-कैप की ग्रोथ या फिर स्मॉल-कैप फंड्स का हाई रिटर्न? इस उलझन का एक सरल और प्रभावी समाधान है- फ्लेक्सी-कैप फंड।
बिधूना। मौसम का मिजाज लगातार बदलता नजर आ रहा है। ठंड के बीच अब दिन के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। पारे में छह डिग्री सेल्सियस का उछाल आया है।
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विस्तारFollow Usअर्जुनी क्षेत्र में एक दुकान में शासन द्वारा निर्धारित मात्रा से अधिक शराब बेचे जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीण थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दुकान के एक सेल्समैन को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि जांच में ग्राहकों को तय सीमा से अधिक शराब बेचे जाने की पुष्टि हुई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।
विस्तारFollow Usराम मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित राम दरबार का नाम अब आधिकारिक रूप से राम परिवार कर दिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने यह निर्णय भारतीय संस्कृति और भाषायी शुद्धता को ध्यान में रखते हुए लिया है। ट्रस्ट के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दरबार शब्द उर्दू मूल का है, जबकि राम मंदिर की संकल्पना पूरी तरह सनातन, भारतीय और लोक परंपराओं से जुड़ी हुई है। इसी भाव के अनुरूप अब इसे राम परिवार के नाम से संबोधित किया जाएगा।
अतिरिक्त विन, UP Weather News:जिले में मौसम परिवर्तन के चलते अलसुबह ही धूप निकल रही है। लगातार तीसरे दिन मौसम खुलने के बावजूद गलन बरकरार रही। पूरे दिन चटख धूप निकलने के बावजूद पछुआ हवा के चलने से अधिकतम में 1.3 डिग्री तो न्यूनतम तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। धूप निकलने पर लोग पार्कों में घूमते मिले। वहीं बच्चे खेलते नजर आए।
वॉच न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेरPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Tue, 09 Dec 2025 04:06 PM IST
औरैया। शहर में जलभराव की समस्या बारिश के साथ ही अन्य दिनों में भी देखी जाती है। इसके लिए पालिका की ओर से शहर में बड़े पैमाने पर नालों का निर्माण किया जा रहा है। पालिका 70 लाख के बजट से इन नालों का जाल बिछा रही है। फरवरी माह में यह तैयार भी हो जाएंगे।
डायमंड डिस्काउंट, सारराजस्थान में भ्रष्टाचार एक बार फिर इस कदर बेनकाब हुआ है कि आम जनता का शासन-प्रशासन पर भरोसा डगमगा गया है। सत्ता किसी की भी हो, जनता की उम्मीदें तब ही मिट्टी में मिल जाती हैं, जब व्यवस्था चलाने वालों की नीयत कमजोर पड़ जाए।







