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💢पुराना पॉइंट्स💢सारमाघ मेले में तीन हजार करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। 44 दिन तक चलने वाले मेले में 15 से 20 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। पांच लाख लोगों को रोजगार मिल सकता है। अयोध्या, वाराणसी और अन्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है।
️अल्ट्रा रिसीव,न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ाPublished by:बांसवाड़ा ब्यूरोUpdated Tue, 09 Dec 2025 02:26 PM IST
सारसरगुजा जिला स्थित माँ महामाया एयरपोर्ट, दरिमा में लंबे समय से ठप पड़ी विमानन सेवाओं को पुनः प्रारंभ कराने की मांग को लेकर जिला कांग्रेस, युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के संयुक्त प्रतिनिधि मंडल ने गुरुवार को एयरपोर्ट परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
दैनिक कमेंट,
गोरखपुर ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 12:59 AM IST
😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
पुराना रिवॉर्ड्स, बाड़मेर में राजकीय कन्या महाविद्यालय के बाहर शनिवार को फीस बढ़ोतरी के विरोध में छात्रों का धरना प्रदर्शन चल रहा था। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिए जाने के बाद यह प्रदर्शन शांत हो गया। इसी दौरान कॉलेज परिसर के पास एबीवीपी से जुड़े कुछ पदाधिकारियों को पुलिस गाड़ी में बैठाकर कोतवाली थाने ले आई, जिससे मामला अचानक तूल पकड़ गया।
बोनस ऑफर आज की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर इंडस्ट्री को बदल रहा है। ऐसे समय मेंश्रीरामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी (SRMU)उत्तर भारत के सबसे भविष्य-केंद्रित कैंपस के रूप में सामने आया है। यहां B.Tech और BCA जैसे कोर्सेज में AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस की पढ़ाई की जाती है, वो भी IBM और L&T EduTech जैसे ग्लोबल टेक लीडर्स के सहयोग से।SRMUछात्रों को केवल डिग्री नहीं, एक मजबूत और ग्लोबली कॉम्पिटीटिव करियर देता है।
आजमगढ़। जिले में हुई 21वीं पशुगणना में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। मुख्य दुधारू पशु गाय, भैंस और बकरी की संख्या में कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट बता रही है कि लोगों का पशुपालन से मोह भंग हो रहा है। पशुओं की संख्या कम होने से दूध का उत्पादन भी जिले में कम हुआ है इसके बाद भी जिले में धड़ाधड़ मिठाई और दूध से बने उत्पादों की दुकानें खुल रही हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है इन दुकानों पर दूध की कोई कमी नहीं होती है। आखिर यह दूध कहां से आता है यह बताने वाला कोई नहीं है। पांच साल में 2,04,490 गायें कम हो गईं। जोकि पिछली पशुगणना से लगभग आधी हैं। 1,72,649 भैंसें और 11,944 बकरियां कम हुईं हैं।
कूपन डाउनलोड, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारांPublished by:प्रिया वर्माUpdated Wed, 26 Nov 2025 09:27 PM IST







