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💢पैसे💢सारबूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शिकारियों की सक्रियता सामने आई है। भीमलत बांध के पास काला कुआ क्षेत्र में एक युवा नर पैंथर जंगल में लगाए गए फंदे में फंसकर घायल हो गया।
️प्लेटिनम कलेक्ट,सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग की एक महत्वपूर्ण सम्भागीय बैठक आगामी 11 जनवरी 2026 (रविवार) को कोया कुटमा भवन, परपा, जगदलपुर में आयोजित की जाएगी। बैठक का आयोजन सुबह 11 बजे से किया जाएगा, जिसमें बस्तर संभाग के सभी जिलों के पदाधिकारी एवं विभिन्न आदिवासी समाजों के अध्यक्ष शामिल होंगे।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू- फोटो : अमर उजाला
विस्तारFollow Usजशपुर जिले में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक भतीजी ने अपने बड़े पिता आरटीओ अधिकारी विजय निकुंज के घर से 51 लाख रुपये से अधिक की चोरी की साजिश रची। इस मामले में जशपुर पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह सनसनीखेज वारदात आईफोन खरीदने के लालच से शुरू हुई और बड़े चोरीकांड में तब्दील हो गई। आरोपियों ने नगद रकम और सोने के जेवर चुराकर लग्जरी कार खरीदी, महंगी पार्टियां कीं और मौज-मस्ती की।
सारभरतपुर के कुम्हेर थाना क्षेत्र में एक विवाहिता की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। परिजनों ने ससुराल पक्ष पर जहर देकर हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस जांच में जुटी है।
पॉइंट्स, विस्तारFollow Usराजस्थान के सीकर जिले के नेहरा की ढाणी गांव के रहने वाले स्व. सुरेंद्र का शव मृत्यु के 56 दिन बाद शुक्रवार सुबह दुबई से जयपुर पहुंचेगा। 33 वर्षीय सुरेंद्र 27 जुलाई को रोजगार के लिए जयपुर से दुबई गए थे। लेकिन 2 अगस्त को उनकी अबूधाबी (यूएई) में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद भी उनका शव भारत नहीं भेजा गया और दुबई में ही रोक लिया गया। छोटे भाई सुरजीत सिंह के दुबई जाकर डीएनए सैंपल देने के बावजूद यूएई पुलिस और भारतीय दूतावास की ओर से 19 सितंबर को कहा गया कि शव को भारत भेजने में अभी एक महीना या उससे भी अधिक समय लग सकता है।
साप्ताहिक वीडियो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावतUpdated Fri, 09 Jan 2026 11:05 PM IST
विस्तारFollow Usबीजापुर में कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बड़े बदलाव कर गरीबों के काम करने और मजदूरी पाने के अधिकार को छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और मांग करने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब यह अधिकार समाप्त हो गया है और सरकार की मर्जी से काम मिलेगा।
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