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💢अल्ट्रा क्लिक💢जाति है कि जाती नहीं... बिहार के लिए हमेशा यह कहा जाता रहा है। चुनावों में तो खासकर। लेकिन, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार सरकार की वापसी के लिए मतदाताओं ने इन कहावतों को किनारे कर एकतरफा मतदान किया। परिणाम सामने है। यादव और मुस्लिम के नाम का समीकरण रखने वाली पार्टी बुरी तरह पराजित हुई। इसके साथ ही एक बात चर्चा में आ गई कि अरसे बाद बिहार विधानसभा एक खास जाति के दबदबे से बाहर निकल रहा है। इस बार विधायकों का जातीय समीकरण बहुत हद तक अलग है। दलित भी खूब हैं, सवर्ण भी मजबूत। देखिए, पूरा गणित।
️वॉच,सोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालT20 WCWest Bengalबीवी ने मरवा डाला पतिकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरयूपीBihar Newsप्रत्यक्ष कर संग्रह में 9% का उछालविकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेरPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Mon, 24 Nov 2025 02:34 PM IST
मासिक विज़िट,
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) अंतर्गत बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसकी एक प्रेरक मिसाल मुंगेली जिले के पथरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदुली से सामने आई है, जहां सत्कार महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुष्मिता जाटवर ने संघर्ष से सफलता तक का उल्लेखनीय सफर तय किया है।
सारप्रदेश के सबसे बड़े संगठन अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के प्रांत संयोजक कमल वर्मा के नेतृत्व में प्रदेशभर के समस्त कर्मचारी 29 से 31 दिसंबर तक 3 दिवसीय निश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। बीजापुर में भी चारों विकासखंड बीजापुर, भैरमगढ़, भोपालपटनम व उसूर में कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
जालंधर/अमृतसर।न्यूजीलैंड में सिखों के नगर कीर्तन को एक बार फिर विरोध का सामना करना पड़ा। 20 दिनों में यह दूसरी बार है जब सिखों के धार्मिक उत्सव को बाधित किया गया। इस बार डेस्टिनी चर्च से जुड़े ब्रायन टमाकी और उनके समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर हाका डांस किया और नारे लगाए। उन्होंने कहा कि ये किसकी गलियां हैं? ये गलियां हमारी हैं। सरेआम तलवारें और झंडे लहराने की इजाजत किसने दी। हम अपनी संस्कृति को बर्बाद नहीं होने देंगे।
डाउनलोड रिसीव, अमर उजाला नेटवर्क, रायपुरPublished by:अमन कोशलेUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:58 AM IST
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फल व्यवसायी की मौत ने पुलिस को उलझाया- फोटो : अमर उजाला
ऑफर कम्पलीट, विस्तारFollow Usबीजापुर में रानीबोदली का नाम सुनते ही आज भी लोगों की रूह कांप उठती है। 15 मार्च 2007 को माओवादियों द्वारा रानीबोदली में किया गया खूनी हमला देश कभी नहीं भूल सकता, जिसमें 55 जवान शहीद हुए थे और 25 जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे। कभी नक्सल हिंसा और जनताना सरकार की दरबार के लिए कुख्यात यह क्षेत्र अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। बदलते हालात के बीच कलेक्टर संबित मिश्रा के निर्देशन तथा जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में रानीबोदली के आश्रित ग्राम गट्टापल्ली में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास चौपाल का आयोजन किया गया। जिला पंचायत के अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित इस चौपाल में ग्रामीणों को शासन की योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया।







