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💢रिसीव💢बबेरू। अद्भुत चौराहा के सुंदरीकरण और सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन द्वारा लगभग दो सौ व्यापारियों को अतिक्रमण हटाने का सात दिनों का नोटिस दिए जाने के बाद स्थानीय व्यापारियों में तीव्र रोष व्याप्त है। व्यापारियों का आरोप है कि सुंदरीकरण के नाम पर उनका आजीविका का साधन उजाड़ा जा रहा है। इस मुद्दे पर शनिवार को राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के नगर अध्यक्ष केके महंत के नेतृत्व में व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए अनिश्चितकालीन व्यापार बंद करने की घोषणा की।
️गोल्ड कैश,MaharashtraDonald Trumpविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालRCB vs UPIranकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिCivic Pollsयूपी
शहर के अंतरजनपदीय स्टेशन पर सीज कीए गए वाहन को खड़ा कराते पीटीओ रविंद्र चंद त्यागी।
शेयर मोबाइल, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुरPublished by:अनूपपुर ब्यूरोUpdated Mon, 29 Sep 2025 07:44 PM IST
जयपुर में सड़कों और रेलवे स्टेशन पर जांच करती पुलिस- फोटो : अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़वानीPublished by:बड़वानी ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 08:19 AM IST
साररात्रि गश्त पर तैनात सहायक उप निरीक्षक रविशंकर गुप्ता, प्रधान आरक्षक सुरेंद्र शर्मा और मामले में समय पर अपराध दर्ज न करने वाले कार्यवाहक निरीक्षक संजय खलको को कर्तव्य में लापरवाही बरतने पर निलंबित कर लाइन अटैच किया गया है।
ऑनलाइन, विस्तारFollow Us1 नवंबर 1983, यह वह ऐतिहासिक दिन था जब राजस्थान के दक्षिणी सिरे पर बसे जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले की तकदीर बदलनी शुरू हुई। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कागदी पिकअप वियर पर बटन दबाकर माही बांध की नहरों में जलप्रवाह शुरू किया, जिसने इस क्षेत्र के जीवन, भूमि और विकास की दिशा ही बदल दी। उस पल के साथ ही बांसवाड़ा का नाम ‘कालापानी’ से निकलकर ‘हराभरा जनपद’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
दैनिक डिपॉजिट
बालोद जिले को नौ जनवरी से शुरू हो रहे देश के पहले नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी की मेजबानी मिली है। ग्राम दुधली में 146 एकड़ क्षेत्र में अस्थायी शहर बसाया गया है, जहां हजारों बच्चे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।
विथड्रॉ, विस्तारFollow Usजिले में छत्तीसगढ़ की सीमा को पार करते हुए छह दिनों से तीन हाथी जिले की सीमा में विचरण कर रहे हैं। लगातार यह क्षेत्र हाथियों का विचरण क्षेत्र बना हुआ है, जहां रह-रह कर हाथी पहुंचते रहते हैं। रात्रि के समय हाथी लगातार विचरण कर ग्रामीणों के घरों-फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। पूर्व में भी कई ग्रामीणों की हाथी के हमले से मौत हो चुकी है। इससे डरे-सहमे ग्रामीण अब हाथियों से अपनी जान बचाने के लिए पेड़ पर आशियाना बना रखा है। दिन भर तो यह अपने घर में रहते हैं, लेकिन रात होते ही पेड़ में बनाए गए आश्रय स्थल पर हाथियों की निगरानी करते हुए अपनी जीवन रक्षा भी कर रहे हैं।







