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💢ऐप सर्वे💢विस्तारFollow Usअंबिकापुर के अधिवक्ता नीरज वर्मा ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, अंबिकापुर के सामने एक कंप्लेंट केस फाइल किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि महावीर हॉस्पिटल में गत दिनों उनकी बेटी कु. आंचल वर्मा को गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था,उसे टाइफाइड और डेंगू का पता चला था और क्योंकि प्लेटलेट काउंट कम हो रहा था, इसलिए ब्लड ट्रांसफ्यूजन की ज़रूरत थी और इसलिए, दो यूनिट ब्लड की ज़रूरत थी। इलाज के दौरान अस्पताल के संचालक डाक्टर सुधांशु किरण और अधिवक्ता नीरज वर्मा के बीच कुछ कहासुनी हुई। नीरज वर्मा का आरोप था कि उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया और सभी सुविधाएं होने के बाद भी मरीज़ का इलाज करने से मना किया गया था।चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट,अंबिकापुर के आदेश पर गांधी नगर पुलिस ने अस्पताल संचालक पर एफ आई आर दर्ज किया था।
️कमाई,
गोरखपुर ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:37 AM IST
पॉइंट्स डिस्काउंट, अमर उजाला ब्यूरो, बरेलीPublished by:मुकेश कुमारUpdated Mon, 12 Jan 2026 02:47 PM IST
अलीगढ़ के देहली गेट घुड़ियाबाग में 11 जनवरी दोपहर भाजपा नेता व युवती के बीच मारपीट हो गई। इसके बाद जब दोनों पक्ष थाने पहुंचे तो वहां भाजपा नेता को कुर्सी पर बिठाने पर वह बिफर गई। हंगामा करते हुए युवती की मां ने जूता तक उठा लिया। इसका वीडियो वायरल हो रहा है। पुलिस ने दोनों को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा है।
सारइंदिरा सागर परियोजना से प्रभावित किसानों को मुआवजा न मिलने पर बड़वानी प्रशासन संकट में है। सुप्रीम कोर्ट तक आदेश बरकरार रहने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। अदालत ने कलेक्टर कार्यालय सहित भूमि कुर्क कर नीलामी की चेतावनी दी है। कलेक्टर की गैरहाजिरी से स्थिति गंभीर बनी, प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठे।
बालोद में मां दंतेश्वरी सहकारी शक्कर कारखाने में एक बार फिर अव्यवस्था देखने को मिल रही है। प्रशासन ने बिना तैयारी किए बॉयलर का पूजन कर किसानों को गन्ना लाने के टोकन जारी कर दिए, लेकिन कारखाने का संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका। इससे गन्ना लेकर पहुंचे सैकड़ों किसान परेशान हैं।
शेयर रिसीव, संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वरUpdated Wed, 07 Jan 2026 11:49 PM IST
गोल्ड लाइक हादसे के बाद बाइक के उड़े परखच्चे- फोटो : अमर उजाला
दैनिक ट्रांसफर, सारपीसीसी सचिव ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में किए गए हालिया बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा बताया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खनन की अनुमति दी है। ऐसे में 100 मीटर से नीचे के भूभाग को अब अरावली पहाड़ी नहीं माना जाएगा।







