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💢फ्री💢अमर उजाला ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:06 PM IST
️छोटा साइन अप,चेटुवा गांव में मेला शांतिपूर्ण संपन्न- फोटो : अमर उजाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्याUpdated Mon, 12 Jan 2026 09:45 PM IST
इनवाइट, जिले के पचपदरा क्षेत्र में एक सड़क हादसे ने राहगीरों और स्थानीय लोगों में हड़कंप मचा दिया। जोधपुर से बालोतरा की ओर नियमित सवारी लेकर आ रही राजस्थान रोडवेज की बस अचानक सामने से आ रहे एक ट्रैक्टर से टकरा गई। हादसा इतना जोरदार था कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह मुड़ गया और शीशे टूटकर सड़क पर बिखर गए।
अंबारी। अहरौला ब्लाक के ग्राम पंचायत ओरिल में लगभग 1.60 करोड़ रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी बीते तीन वर्षों से शोपीस बनी हुई है। जल निगम ने शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ओरिल ग्राम पंचायत का चयन किया गया था। 20 हजार की आबादी और 28 पुरवों में फैले इस गांव में टंकी निर्माण के बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब पीने के पानी की समस्या खत्म होगी, लेकिन घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी खामियों से काम रुक गया। प्रधान राम अवतार यादव का कहना है कि करीब तीन साल से टंकी से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। टंकी पर लगा ट्रांसफॉर्मर जल चुका है और पाइपलाइन में भारी लीकेज है। आबादी और क्षेत्रफल को देखते हुए गांव में कम से कम तीन टंकियों की आवश्यकता है। घटिया पाइप और सामान लगाने के कारण टंकी को अब तक हैंडओवर नहीं लिया गया है। वहीं, पूर्व प्रधान बिनोद यादव, संजय यादव सहित जगदीश बिंद, सियाराम गुप्ता, अरविंद समेत कई ग्रामीणों ने टंकी को तत्काल चालू कराने की मांग की है।
अंबाला में कोहरे और कडाके की ठंड में अपना बचाव करते हुए राजमार्ग से गुजरता बाइक सवार। संवाद- फोटो : credit
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइचUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:09 AM IST
वीडियो लॉग इन, बस्ती। मकर संक्रांति पर्व पर प्रयागराज माघ मेले में स्नान करने जाने वाले श्रद्धालुओं को इस बार बड़ी सहूलियत दी गई है। भीड़ और परिवहन की परेशानी को देखते हुए बस्ती रोडवेज डिपो ने विशेष बस सेवा की भी व्यवस्था की है।
सिल्वर वॉच सारविकसित गांव-विकसित देश के संकल्प के साथ जिला पंचायत आगरा का 59 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया। अब बटेश्वर मेला ताज महोत्सव की तर्ज पर आयोजित होगा। इसके साथ ही खेल, सड़क, स्वच्छता और स्मार्ट विलेज पर विशेष फोकस रखा गया।
डायमंड डाउनलोड, बांदा। इंदौर में दूषित पानी के सेवन से मौतों के बाद भी जिम्मेदार चेत नहीं रहे हैं। शहर में 56 हजार परिवारों को शुद्ध पीने का पानी मुहैया कराने के दावे जमीनी सच्चाई के सामने तालमेल नहीं खा रहे। केन नदी व नलकूपों से पानी स्टोर करने के लिए बनी पानी की टंकियां सालों से साफ नहीं हुई। हालांकि किसी टंकी में मई तो किसी में अप्रैल महीने में सफाई का उल्लेख किया गया है।







