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राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री और देश के भूतपूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव परेशान हैं। दुखी हैं। चौतरफा परेशानी में हैं। हमेशा 'फैमिली मैन' रहे लालू प्रसाद यादव परिवार के कारण ही परेशान हैं। एक तो बेटे को मुख्यमंत्री बनाने की हसरत पूरी नहीं हुई और दूसरी तरफ पार्टी की करारी हार के साथ परिवार में उपद्रव मच गया। खुद बड़े बेटे को दूर किया था, अब छोटा बेटा दूर-दूर कर विदेश यात्रा पर निकल गया। रही-सही कसर किडनी दान कर जीवन बचाने वाली बेटी रोहिणी आचार्य की बातें टीस दे रहीं। करें तो क्या? राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष की परेशानी सिर्फ दूर से दिखने वाली ही नहीं, अंदर से समझने वाली भी है। हर एंगल को समझा रही है यह स्टोरी।
रजिस्टर, छतरपुर जिले के बड़ामलहरा महाविद्यालय में कक्षाओं के भीतर रील बनाने कक मामला सामने आया है, जहां के मामले को गंभीरता से लेते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य (अंकुर तिवारी) ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित छात्राओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही, समस्त छात्र-छात्राओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में इस प्रकार की अनुशासनहीन गतिविधि दोहराई न जाए।
टनकपुर के तहसील सभागार में टैक्सी बाइक चालक और टुक-टुक यूनियन की बैठक लेते एसडीएम आकाश जोशी। सं
विस्तारFollow Usबीकानेर में भारतीय परिवहन मजदूर संघ के 26वें त्रैवार्षिक अखिल भारतीय अधिवेशन का शुभारंभ शनिवार को गंगाशहर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में हुआ। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने मजदूरों की भूमिका, आर्थिक प्रगति तथा स्वदेशी के महत्व पर अपने विचार रखे।
गेट साइन अप, बलरामपुर तहसील कार्यालय में दस्तावेजों के एवज में अवैध धन मांगने का एक गंभीर मामला सामने आया है। टांगरमहरी निवासी दीपक यादव ने तहसील कार्यालय के समक्ष तख्ती लेकर धरना प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ एक बाबू और चौकीदार ने उन्हें अधिकार अभिलेख जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए ₹500 की रिश्वत मांगी, जबकि इसके लिए निर्धारित सरकारी शुल्क मात्र ₹10 था। दीपक यादव के पास ₹200 ही उपलब्ध थे और वह शेष ₹300 के लिए राजस्व अधिकारियों से “भीख” मांगने की बात कहते हुए धरने पर बैठे थे।
रिसीव चंपावत। कभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।
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