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💢विशेष वीडियो💢विस्तारFollow Usमहंगाई को मात देने और लंबी अवधि में अपनी पूंजी को बढ़ाने के लिए इक्विटी को हमेशा से सबसे सशक्त माध्यम माना गया है। फिक्स्ड इनकम या पारंपरिक निवेश के साधनों की तुलना में, इक्विटी में लंबी अवधि के दौरान 'परचेजिंग पावर' को न केवल बनाए रखने बल्कि उसे बढ़ाने की क्षमता अधिक होती है।
️बोनस फ्रेंड्स,विस्तारFollow Usरविवार की रात नगर में पुराने स्टेट बैंक के सामने स्थित पंडाल के पास मांस का टुकड़ा और हड्डियां सड़क पर फेक जाने के बाद माहौल काफी तनाव पूर्ण हो गया। मामले की शिकायत धार्मिक संगठनों ने थाना प्रभारी से करते हुए इस पर कार्रवाई की मांग की। इसके पश्चात पुलिस ने विभिन्न सीसीटीवी कैमरे से इसकी जांच करने के बाद ऐसा करने वाले स्थानीय व्यापारी के कर्मचारी के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है। पॉलिथीन के अंदर मास के टुकड़े होने के कारण पंडाल के सामने सड़क पर कुत्ते उसे फैला रहे थे, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। नगर के धार्मिक संगठनों एवं समिति सदस्यों ने पूरे मामले में जांच की मांग ज्ञापन सौंपते हुए की। पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान के निर्देशन में थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ल ने सूचना पाते ही घटना स्थल पहुंच टीम जांच पड़ताल में जुट गई।
संवाद न्यूज एजेंसीPublished by:गायत्री जोशीUpdated Thu, 08 Jan 2026 01:55 PM IST
प्रीमियम कैश, विस्तारFollow Usकेंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ फेसबुक पर की गई टिप्पणी कांग्रेस के पूर्व पार्षद को भारी पड़ गई है। महेंद्र जैन मिंदा के खिलाफ सिंधिया समर्थकों की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।
विस्तारFollow Usउत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) अगले सप्ताह से अधिकतम गति (90 किमी. प्रति घंटा) से मेट्रो के ट्रायल करेगा। सिग्नल, ट्रैकिंग, पावर सिस्टम के बाद अंत में डमी यात्रियों के साथ ट्रायल होगा। इसके बाद अप्रैल से मेट्रो आरबीएस स्टेशन तक चलने लगेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ाUpdated Fri, 09 Jan 2026 11:37 PM IST
डिस्काउंट वीडियो, राजस्थान प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बालोतरा जिले के गिड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में सामने आ रहे हालात इन दावों की सच्चाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यहां नियमों को ताक पर रखकर मरीजों को सरकारी दवाइयों के बजाय निजी मेडिकल से बाहरी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आरोप है कि यह पूरा खेल कुछ चिकित्सकों और निजी मेडिकल संचालकों की आपसी मिलीभगत से संचालित हो रहा है।







