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️ट्रांसफर,सारयूपी के बांदा से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। यहां पिता ने डेढ़ वर्षीय इकलौते बेटे की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव यमुना में फेंक दिया। पत्नी के सोते ही आरोपी पिता मासूम को उठाकर घर से निकला था। तीन दिन तक तलाश के बाद पूछताछ करने पर राज खुला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाटPublished by:बालाघाट ब्यूरोUpdated Thu, 11 Dec 2025 04:11 PM IST
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सारपड़ोसी के साथ झगड़े में समझाइश करने पहुंची बेटी और दोहिते पर उसके ही पिता ने कुल्हाड़ी से वार कर दिया जिससे मासूम की मौके पर ही मौत हो गई और बेटी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।
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लांजी क्षेत्र की ग्राम पंचायत टेमनी के चौंदाटोला गांव में छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद शुक्रवार रात उस वक्त बढ़ गया, जब प्रतिमा स्थल पर बने कॉलम तोड़ दिए गए। घटना के बाद कुनबी और मरार समाज के लोग आमने-सामने आ गए, जिससे गांव में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। पुलिस बल तैनात कर हालात पर नजर रखी जा रही है।
वीआईपी कम्पलीट, विस्तारFollow Usअल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।
कैश डिस्काउंट विस्तारFollow Usजिले के ग्राम तलवाड़ा डेब में शादी के पांच साल बाद परिवार में जन्मी बच्ची की मौत ने पूरे परिवार को शोक में डाल दिया है। नविता पति राहुल कर्मा के यहां 29 दिन पहले बेटी का जन्म हुआ था। 16 नवंबर को बच्ची की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां से जच्चा और बच्चा दोनों को इंदौर रैफर किया गया लेकिन 108 एंबुलेंस रास्ते में ही खराब होने से बच्ची को दूसरे वाहन में इंदौर ले जाना पड़ा। इसी दौरान बच्ची की मौत हो गई। परिजनों ने एंबुलेंस के खराब होने के कारण देरी होने पर बच्ची की मौत और चालक पर अभ्रदता का भी आरोप लगाया है।
पैसे, विस्तारFollow Us'जिन्हें नसीब नहीं छत, उनकी करें बात, सर्द हवाओं में खुले आसमां तले गुजर रही रात' किसी कवि की कविता की यह पंक्तियां बांसवाड़ा जिले में उन लोगों पर सटीक बैठ रही है, जो बेघर और जरूरतमंद हैं। सर्द हवाओं में जरूरतमंद ठिठुरने को मजबूर हैं, लेकिन जिला प्रशासन और नगर परिषद ने अभी तक ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।







