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️वॉच लाइक,जिले के दबोह क्षेत्र में पुरानी रंजिश ने खौफनाक रूप ले लिया। रायपुरा गांव में दो पक्षों के बीच विवाद के दौरान पांच लोगों ने मिलकर अली उर्फ रुद्रप्रताप सिंह जाटव पर लाठी-डंडों से हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। मृतक का मामा भी गंभीर रूप से घायल हुआ और उसे इलाज के लिए ग्वालियर भेजा गया।
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ऑनलाइन, विस्तारFollow Usबरनाला में यूनिवर्सिटी कॉलेज के पास स्थित संधू पत्ती इलाके में पुरानी रंजिश के चलते देर रात सनसनीखेज फायरिंग की घटना सामने आई है। अज्ञात हमलावरों ने एक विधवा व पंजाब पुलिस विभाग में बतौर होमगार्ड महिला जवान के घर में घुसकर उसके इकलौते बेटे पर गोलियां चला दीं। जिसमें दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को अस्पताल ले जा रहे युवक के चाचा पर भी रास्ते में फायरिंग की गई। इस वारदात में वह भी घायल हुआ है। दोनों घायल युवकों की गंभीर हालते के चलते एम्स बठिंडा रेफर किया गया है।
विस्तारFollow Usछतरपुर जिले के बड़ामलहरा महाविद्यालय में कक्षाओं के भीतर रील बनाने कक मामला सामने आया है, जहां के मामले को गंभीरता से लेते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य (अंकुर तिवारी) ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित छात्राओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। साथ ही, समस्त छात्र-छात्राओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य में इस प्रकार की अनुशासनहीन गतिविधि दोहराई न जाए।
सर्वे डिपॉजिट, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूलPublished by:बैतूल ब्यूरोUpdated Sun, 05 Oct 2025 03:41 PM IST
कम्पलीट कंदवा। क्षेत्र के कोदई स्थित साधन सहकारी समिति असना में बृहस्पतिवार को सुबह से नंबर लगाने के बावजूद खाद न मिलने से नाराज किसानों ने समिति के सचिव और एक किसान संगठन के मंडल प्रवक्ता को पांच घंटे तक कमरे में बंद रखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने ज्योंही दरवाजा खोला किसान यूनियन का तथाकथित मंडल प्रवक्ता मौके से भाग निकला। करीब पांच घंटे बाद रात नौ बजे एआर कोऑपरेटिव श्रीप्रकाश उपाध्याय मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाकर और दो दिन पर्याप्त खाद वितरित कराने का आश्वासन देकर शांत कराया। इसके बाद किसानों ने सचिव को मुक्त कर दिया।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंडPublished by:अमर उजाला ब्यूरोUpdated Sun, 28 Dec 2025 09:09 PM IST
साइन अप, विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।







