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💢गोल्ड वॉच💢न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुरPublished by:आशुतोष प्रताप सिंहUpdated Sat, 06 Dec 2025 10:14 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी, चुराह (चंबा)।Published by:Krishan SinghUpdated Mon, 12 Jan 2026 10:27 AM IST
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सारबेमेतरा जिले के नवागढ़ में 26 से 28 दिसंबर तक राज्य स्तरीय गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव का आयोजन होगा। इस महोत्सव में सीएम विष्णुदेव साय भी शामिल होंगे।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुरPublished by:हिमांशु प्रियदर्शीUpdated Tue, 09 Dec 2025 10:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 01:39 AM IST
डायमंड इनवाइट, सारबुरहानपुर में ईद-उल-अजहा के दिन एक बहुत ही खास नज़ारा देखने को मिला। यहां एक लाख से ज़्यादा मुस्लिम लोगों ने मिलकर नमाज़ पढ़ी। शाही ईदगाह से लेकर आसपास की सड़कों तक लोग सिर झुकाकर दुआ मांगते नजर आए। पूरे शहर का माहौल दुआओं और अमन-शांति की कामनाओं से भर गया।
साप्ताहिक पैसे आज शुक्रवार को बेमेतरा जिले के कठिया गांव में छत्तीसगढ़ बांस तीर्थ संकल्पना सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल समेत जिले के जनप्रतिनिधि मौजदू थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बांस के महत्व, इसके आर्थिक लाभ तथा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांस को घास की श्रेणी में शामिल करने के ऐतिहासिक फैसले ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।
चंबा। वन मंडल चंबा में कशमल की जड़ों के दोहन को लेकर स्थानीय लोग व ठेकेदार आमने सामने हो गए हैं। अब तक ठेकेदार लोगों को दस रुपये प्रति किलो की दर से कशमल जड़ों का दाम दे रहे थे जबकि दवा कंपनियों को ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। इसकी भनक लगते ही स्थानीय लोग दाम बढ़ाने की मांग पर अड़ गए हैं। अब वे दस रुपये की जबह 18 रुपये प्रति किलो दाम देने की मांग कर रहे हैं। यह दाम चुकाने के लिए ठेकेदार तैयार नहीं हाे रहे हैं। इसके चलते कशमल दोहन क्षेत्र में थम गया है। हालांकि, कुछ इलाकों में लोग इसके दोहन का विरोध भी कर रहे हैं। कुछ मात्रा में उन्होंने उखाड़ी गई कशमल को जलाया भी है। फिलहाल क्षेत्र के लोग अब दाम बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं। ऐसे में यह मामला अब लोगों व ठेकेदार के बीच में फंस गया है। विभाग चाहकर भी इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। विभाग के कर्मचारी सही तरीके से कशमल दोहन पर निगरानी रख सकते हैं। ये जड़ें स्थानीय लोग किस दाम पर बेच रहे हैं और ठेकेदार आगे किस दाम पर बेच रहा है, इसमें उनका कोई लेना-देना नहीं है।
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