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💢गोल्ड कमाई💢विस्तारFollow Usआज शुक्रवार को बेमेतरा जिले के कठिया गांव में छत्तीसगढ़ बांस तीर्थ संकल्पना सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल समेत जिले के जनप्रतिनिधि मौजदू थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बांस के महत्व, इसके आर्थिक लाभ तथा किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांस को घास की श्रेणी में शामिल करने के ऐतिहासिक फैसले ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।
️सर्वे पॉइंट्स,
सारMP: हवलदार कैलाश धुर्वे को अचानक घबराहट और उल्टी की शिकायत होने लगी। जैसे ही इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को मिली, परिक्षेत्र नावरा के रेंजर पुष्पेंद्र जादौन वनकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और उन्हें तत्काल नेपानगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां उपचार के दौरान सुबह करीब 5 बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
डिस्काउंट, विस्तारFollow Usवनमंडल अंतर्गत कूप कटाई को लेकर हाल के दिनों में ग्रामीणों के बीच असमंजस और आपत्तियों की स्थिति बनी हुई थी। इसी संदर्भ में वन विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने कहा है कि कूप कटाई पूरी तरह शासन के प्रावधानों पर्यावरणीय नियमों और ग्रामसभा की प्रक्रिया के अनुरूप ही की जा रही है।
भीलवाड़ा जिले के करेड़ा थाना क्षेत्र के नागा का बाड़िया गांव में बीती रात एक दिल दहला देने वाली पारिवारिक वारदात सामने आई। यहां एक पोते ने अपने ही दादा की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। घटना इतनी भयावह थी कि गांव में दहशत और तनाव का माहौल पैदा हो गया। पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर करेड़ा चिकित्सालय की मोर्चरी में रखवाया है। मृतक की पहचान मोहनलाल बागरिया के रूप में हुई है।
पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट समेत अन्य नेता।
राजधानी रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में आत्महत्या का मामला सामने आया है। एक व्यवसायी ने अपने ही घर में जान दे दी। मृतक की पहचान रंजन पुरोहित के रूप में हुई है, जो राजधानी में विज्ञापन व्यवसाय से जुड़े हुए थे।
स्टूडेंट,
कैश इनाम उत्तराखंड में इस साल कम बर्फबारी और बारिश ने राज्य की आर्थिकी पर गहरी चोट की है। इससे न सिर्फ पहाड़ों में पर्यटन कारोबार प्रभावित हुआ है बल्कि फसलों पर भी मार पड़ी है। यही नहीं बारिश और बर्फबारी न होने से जंगल में आग की घटनाएं भी बढ़ी हैं। स्थिति यह है कि 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ में आमतौर पर दिसंबर में बर्फ की चादर जम जाती थी, लेकिन इस वर्ष जनवरी के करीब मध्य तक क्षेत्र पूरी तरह बर्फ विहीन बना हुआ है। यहां पर पहली बार ऐसी स्थिति देखी जा रही है। इससे विशेषज्ञ भी पौधों के प्राकृतिक जीवन चक्र प्रभावित होने की आंशका जता रहे हैं। राहत की बात है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह के बाद से बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई जा रही है।
गाजियाबाद ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 10:43 PM IST
फ्री ईज़ी, संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बाUpdated Mon, 12 Jan 2026 11:09 PM IST







