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💢गोल्ड कमाई💢पक्का मकान अब बाधा नहीं, आयु सीमा बढ़ने से पहले निरस्त आवेदन भी होंगे शामिल
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कलेक्ट ऑफर, चंबा के कियाणी में कड़ाके की ठंड के चलते स्कूटी की सीट पर पड़ा कोहरा।संवाद- फोटो : संवाद
सारPatna News: बिहार में निजी और कमर्शियल वाहनों की श्रेणी बदलने की प्रक्रिया आसान कर दी गई है। फिटनेस, टैक्स भुगतान और दो साल उपयोग की शर्त तय की गई है। नियम उल्लंघन पर जुर्माना और सजा का प्रावधान किया गया है।
विस्तारFollow Usछत्तीसगढ़ पुलिस ने हाल ही में कांस्टेबल भर्ती के नतीजे जारी किए हैं। परिणाम जारी होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि कम अंक प्राप्त करने वालों का चयन हुआ है। इस तरह की जानकारी सामने आने के बाद अब बेमेतरा एसपी कार्यालय में हेल्प डेस्क बनाया गया है। वहीं मामले को लेकर कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने पुलिस भर्ती में सरकार ने बड़ा घोटाला किया है। अपने चहेते लोगों को लिए पूरी तरह से धांधली की गई है।
बोनस डाउनलोड, न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बूंदीPublished by:बूँदी ब्यूरोUpdated Sat, 29 Nov 2025 07:46 PM IST
फ्री विस्तारFollow Usजिले में एक सड़क हादसे में बाइक सवार की मौत हो गई है। यह हादसा बेमेतरा थाना क्षेत्र के ग्राम झलमला आदिशक्ति ढाबा के पहले बेमेतरा-सिमगा रोड के पास मिली है। थाना से मिली जानकारी अनुसार मृतक परमानंद साहू पिता शिवनंदन साहू उम्र 35 निवासी ग्राम खिलोरा अपनी बाइक से घर जा रहा था। तभी घटना स्थल पर किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। इस हादसे में परमानंद साहू को गंभीर चोट आई।
चंपावत। चंपावत जिला अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) बनने से गंभीर मरीजों का इलाज आसान होगा। करोड़ो की लागत से बनने वाले सीसीयू से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। जिला अस्पताल परिसर में 50 बेडेड सीसीयू का निर्माण कार्य करी 20.22 करोड़ की लागत से ब्रिडकुल कर रहा है। सीसीयू का निर्माण पूरा होने के बाद गंभीर मरीजों को रेफर नहीं करना पड़ेगा।
कमाई पैसे, विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।







