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💢कम्पलीट💢रुपईडीहा में लाल-नीली बत्ती लगी इनोवा के साथ पकड़े गए आरोपी। - स्रोत : एसएसबी
️डिपॉजिट,विस्तारFollow Usबड़वानी जिले के सेंधवा से लगभग 40 किलोमीटर दूर वरला थाना क्षेत्र के बेलघाट गांव में बुधवार शाम एक नाबालिग का कंकाल बरामद होने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान 14 वर्षीय आकाश पिता सायसिंग के रूप में हुई है, जो 22 अगस्त से लापता था। कंकाल के पास मिले कपड़ों और हड्डियों के आधार पर परिजनों ने उसकी पुष्टि की।
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अतिरिक्त कम्पलीट,
बालोतरा जिले के समदड़ी नगर पालिका क्षेत्र के मुथो के वेरा इलाके से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाले महेंद्र माली का जीवन बीते करीब तीन दशक से बेड़ियों में बंधा हुआ है। मानसिक विक्षिप्तता से जूझ रहे महेंद्र को उनके ही परिजनों ने मजबूरी में जंजीरों से बांधकर रखा है, ताकि वह स्वयं को या दूसरों को नुकसान न पहुंचा सके।
विस्तारFollow Usअल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी में इजाफा हुआ है। चिकित्सा शिक्षा निदेशालय, उत्तराखंड ने कॉलेज के विभिन्न विभागों में 28 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर नियुक्ति को स्वीकृति प्रदान की थी। इसमें से विभिन्न विभागों में आठ असिस्टेंट प्रोफेसरों ने तैनाती ले ली है। इससे जहां मरीजों को राहत मिलेगी वहीं डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी पटरी पर आएगी।
बाह। जैतपुर के चौरंगाबीहड़ गांव में खुरपका, मुंहपका की चपेट में आने से रीमा देवी एवं फूलमती की कई बकरियां बीमार हो गई हैं। एक बकरी मर भी गई थी। बकरियां चारा खा पा रही थी और न ही चल पा रही थी। सोमवार को पशुपालन विभाग की टीम चौरंगाबीहड़ गांव पहुंची। बीमार बकरियों का इलाज किया। बकरियां बांधे जाने वाले परिसर की सफाई रखने के लिए पशुपालकों को जागरूक किया। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवांगी उदैनिया ने बताया कि सोमवार को विभाग की टीम ने बीमार बकरियों का उपचार किया है। बचाव के लिए पशुपालकों को प्रेरित किया है।
शेयर विज़िट, बागेश्वर में अल्मोड़ा मैग्नेसाइट कंपनी के कर्मचारियों की भविष्य निधि मद से चार करोड़ की राशि का भुगतान कर दिया गया है। 288 कर्मचारियों को यह लाभ दिया गया है। लंबे समय से कर्मचारी ईपीएफ का रुपया दिलाने की मांग कर रहे थे।
लॉग इन विस्तारFollow Usराजस्थान की माटी का कण-कण शौर्य और गौरवशाली इतिहास की गवाही देता है, लेकिन बानसूर विधानसभा क्षेत्र में यह गौरव आज अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। ग्राम हाजीपुर और बानसूर मुख्य कस्बे की पहाड़ियों पर स्थित ऐतिहासिक किले प्रशासनिक उपेक्षा और पुरातत्व विभाग की उदासीनता के चलते खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। जो किले कभी सुरक्षा के अभेद्य कवच और राजपूताना आन-बान-शान के प्रतीक थे, वे आज सरकारी फाइलों में गुम होकर अपना अस्तित्व खो रहे हैं।
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