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💢कलेक्ट वीडियो💢सारRajasthan Cough Syrup:रामदेवी ने बताया कि उन्हें पहले से सांस की तकलीफ थी। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उसी सिरप का सेवन उनके नाती गुलशन ने भी खांसी होने पर किया था, जिससे उसे चक्कर आए थे, हालांकि अब वह ठीक है।पढे़ं पूरा मामला
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जिले में राजस्थान रोडवेज के दो प्रशासनिक अधिकारियों का कार्यालय में डांस और तमाशा करते हुए वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर एपीओ कर दिया है।
मेगा वॉच,
विस्तारFollow Usराजस्थान के सीकर जिले के नेहरा की ढाणी गांव के रहने वाले स्व. सुरेंद्र का शव मृत्यु के 56 दिन बाद शुक्रवार सुबह दुबई से जयपुर पहुंचेगा। 33 वर्षीय सुरेंद्र 27 जुलाई को रोजगार के लिए जयपुर से दुबई गए थे। लेकिन 2 अगस्त को उनकी अबूधाबी (यूएई) में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद भी उनका शव भारत नहीं भेजा गया और दुबई में ही रोक लिया गया। छोटे भाई सुरजीत सिंह के दुबई जाकर डीएनए सैंपल देने के बावजूद यूएई पुलिस और भारतीय दूतावास की ओर से 19 सितंबर को कहा गया कि शव को भारत भेजने में अभी एक महीना या उससे भी अधिक समय लग सकता है।
बिजनौर। मनरेगा बचाओ को लेकर कांग्रेसियों ने रविवार को शहर में विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद गांधी पार्क में पहुंचकर कांग्रेसियों ने विरोध स्वरूप उपवास रखा। आंदोलन कारियों ने सरकार से मनरेगा पर लिया गया फैसला वापस लेने की मांग की।
मुंगेर सदर अस्पताल के पीछे तोपखाना बाजार स्थित मुंगेर नेशनल अस्पताल पर प्रशासनिक शिकंजा कसता जा रहा है। इलाज के नाम पर भारी राशि वसूलने और भुगतान न होने पर मरीज व परिजनों को बंधक बनाने के आरोप में जिलाधिकारी ने अस्पताल का निबंधन रद्द करने की अनुशंसा की है। डीएम द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने अस्पताल के संचालन में गंभीर अनियमितताएं पाई हैं।
बड़ा फ्री, सारBhilwara News: भीलवाड़ा जिले में 9 माह के बच्चे की मौत अंधविश्वास का शिकार बनकर हुई। मामूली बीमारी पर इलाज की बजाय भोपा के पास ले जाने पर उसने गर्म सरिए से दाग दिया गया। संक्रमण फैलने से बच्चे की हालत बिगड़ी और तीन दिन बाद उसने दम तोड़ दिया।
ईज़ी कुलपति और साहित्यकार मनोज रूपड़ा के बीच तीखा संवाद- फोटो : अमर उजाला
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स्टूडेंट अर्न, कभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।







