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💢प्लेटिनम रजिस्टर💢विस्तारFollow Usसऊदी अरब में काम करने गए बालोतरा जिले के युवक रमेश मेघवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शव को भारत लाने के लिए इंतजार कर रहे मृतक के परिवारजनों का इंतजार एक महीने बाद खत्म हुआ है। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने बताया कि संसदीय क्षेत्र के बालोतरा जिले के सोहड़ा (गिड़ा) निवासी युवक स्व.रमेश कुमार मेघवाल 11 अक्तूबर 2025 को अपने दो साथियों हीराराम मेघवाल (सवाऊ मूलराज) एवं रोशन अली (जाजवा, गिड़ा) के साथ रोजगार हेतु अरब के दोहा (क़तर) गया था। दुर्भाग्यवश 17 नवंबर 2025 को उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। मृत्यु के पश्चात वहां की जटिल कानूनी प्रक्रिया, स्थानीय पुलिस कार्रवाई एवं मेडिकल पोस्टमार्टम की लंबी औपचारिकताओं के कारण पार्थिव शरीर को भारत लाने में अत्यधिक विलंब हुआ।
️साइन अप रिसीव,संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगरUpdated Sat, 10 Jan 2026 11:15 PM IST
अर्न, T20 WCसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालWest Bengalविकसित भारत युवा नेतृत्व संवादकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरयूपीBihar Newsप्रत्यक्ष कर संग्रह में 9% का उछालदिल्ली में फिर टूटा ठंड का रिकॉर्ड
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Thu, 01 Jan 2026 06:38 PM IST
बाड़मेर जिले में रात्रि चौपाल एक बार फिर ग्रामीणों के लिए राहत की वजह बनी। बुधवार को सर्द रात में जिला कलेक्टर टीना डाबी स्वयं जिले की भेडाणा ग्राम पंचायत पहुंची और घंटों ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। सर्दी के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण चौपाल में एकत्र हुए। जहां उन्होंने अपनी समस्याओं को जिला कलेक्टर के सामने रखा। जिसे जिला कलेक्टर टीना डाबी ने गंभीरता से लेते हुए कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को त्वरित राहत प्रदान की।
गेट रिवॉर्ड्स,
टास्क
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाटPublished by:बालाघाट ब्यूरोUpdated Fri, 31 Oct 2025 04:12 PM IST
सर्वे, विस्तारFollow Usपूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह एवं जिला कांग्रेस सरगुजा के जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने शनिवार को राजीव भवन अंबिकापुर में पत्रकार वार्ता करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पारित कर ग्रामीण मजदूरों को काम की संवैधानिक गारंटी दी थी, जिससे अब तक 180 करोड़ से अधिक कार्यदिवस सृजित हुए और 10 करोड़ से ज्यादा परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ।







