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️डायमंड ऑनलाइन,विस्तारFollow Usसामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिकियासैंण से नवजात को हायर सेंटर ले जाने के दौरान उसके रास्ते में मौत हो जाने से आक्रोशित लोगों ने अस्पताल पहुंच कर सांकेतिक तालाबंदी की। उन्होंने नारे लगा कर विरोध जताया। सूचना मिलने पर एसडीएम याक्षी अरोड़ा मौके पर पहुंची। उनके हस्तक्षेप के बाद मामला किसी तरह शांत हुआ।
'आजादी के आंदोलन में आदिवासियों का बड़ा योगदान रहा। प्रकृति की पूजा करने वाले आदिवासियों के कारण ही जल, जंगल और जमीन के साथ ही संस्कृति सुरक्षित है। राजस्थान सरकार आदिवासियों के कल्याण के लिए कृत संकल्पित है।' मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने डूंगरपुर में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर राज्य स्तरीय जनजाति गौरव समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में यह बात कही।
इनवाइट फ्री, संवाद न्यूज एजेंसीPublished by:गायत्री जोशीUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:17 PM IST
3-मेडिकल काॅलेज का निरीक्षण करते प्रभारी मंत्री सूर्यप्रताप शाही व अन्य।-संवाद
टेंडर पाम सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ- फोटो : अमर उजाला
औरैया। तकनीकी खराबी व सिम रीचार्ज न होने से बंद पड़े 30 गोशालाओं के सीसीटीवी कैमरे ठीक करा दिए गए हैं। विकास भवन में बने कंट्रोल रूम से अब इनकी मॉनिटरिंग होने लगी है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और तत्काल कैमरे ठीक कराने को कहा।
टास्क गेट, बानसूर और हाजीपुर के किलों की अनदेखी में हो रही दुर्दशा- फोटो : अमर उजाला
लाइक सांकरा में पुल के ऊपर से निचली गंग नहर में छलांग लगाने वाली किशोरी का दूसरे दिन भी पता नहीं लग सका है। स्थानीय गोताखोर के साथ ही पीएसी की टीम ने भी दिन भर नहर में किशोरी की तलाश की।
विस्तारFollow Usभाटापारा में बुधवार से छत्तीसगढ़ की राजधानी में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच को लेकर पूरे प्रदेश में हलचल तेज है। इसी बीच भाटापारा, जिसे मिनी बॉम्बे और सट्टे के गढ़ के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से शहर के नामचिन और रसूखदार सटोरिए भुमिगत हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार वे दूसरे शहरों से अब भी अपने सट्टे के कारोबार को संचालित कर रहे हैं।
क्लिक रिसीव, विस्तारFollow Usप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आजाद सिंह राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्वतों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सदियों पुरानी अरावली पहाड़ियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राठौड़ के अनुसार अरावली केवल पहाड़ों की शृंखला नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।







