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💢स्टूडेंट💢सारबीजापुर में विधायक विक्रम मंडावी ने आज जिला मुख्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर संभाग का बीजापुर जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां संविधान की पांचवीं अनुसूची लागू है।
️साइन अप,अंबरनाथ नगर परिषदशक्सगाम घाटी पर भारत की लताड़ से बौखलाया चीनयूनियन बजट 2026-27भोपाल के रहमान डकैत की पूरी कहानीखुदरा महंगाई दर में उछालJadeep DhankharShikhar Dhawan Engagement'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...'महारानी कामसुंदरी देवी को भतीजे ने दी मुखाग्निडिलीवरी बॉय बने राघव चड्ढा
सारखालिस्तानी समर्थक व खडूर साहिब से निर्दलीय सांसद अमृतपाल सिंह एनएसए के तहत अप्रैल 2023 से असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। अमृतपाल सिंह ने एनएसए के तहत जारी तीसरे निरोधक हिरासत आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
साइन अप,
इंडोनेशिया के बाली में शुक्रवार रात राजस्थान के कोटा निवासी दंपति पर हमला कर लूट की वारदात हुई। पीड़ित सौरभ रानानी और उनकी पत्नी शिवानी से लुटेरों ने मोबाइल, नकदी और पासपोर्ट छीन लिया। घटना की शिकायत स्थानीय पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई गई, लेकिन पुलिस ने केवल औपचारिकता निभाते हुए अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। राहत की बात यह रही कि इस हमले में दोनों को चोट नहीं आई।
विस्तारFollow Usपटना उच्च न्यायालय ने आज बिहार पुलिस की लापरवाही और कानून के साथ खिलवाड़ करने पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया है कि एक नाबालिग लड़के को, जिसे चोरी के झूठे आरोप में दो महीने से अधिक समय तक गैरकानूनी रूप से जेल में रखा गया, उसे 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस और मजिस्ट्रेट की लापरवाही के कारण एक किशोर का जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार छीना गया है।
वॉच, सारबेमेतरा पुलिस ने आखिरकार सोशल मीडिया पर अश्लील मैसेज भेजने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही पुलिस ने नागरिकों से ये एक अपील भी की है।
गोल्ड मोबाइल बुरहानपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, मौके पर जुटी ग्रामीणों की भीड़।- फोटो : अमर उजाला
विस्तारFollow Usबीजापुर में कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बड़े बदलाव कर गरीबों के काम करने और मजदूरी पाने के अधिकार को छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और मांग करने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब यह अधिकार समाप्त हो गया है और सरकार की मर्जी से काम मिलेगा।
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