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गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
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जिले के मुंगावली, बहादुरपुर और आसपास के क्षेत्रों के 36 बंधक मजदूरों को महाराष्ट्र से मुक्त करा लिया गया है। स्थानीय पुलिस महाराष्ट्र पहुंचकर स्थानीय प्रशासन के सहयोग से इन सभी मजदूरों को वापस लेकर आई। ये मजदूर महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के बासी थाना क्षेत्र के गिरोली गांव में बंधक बनाए गए थे। वहां उन्हें न तो मजदूरी का भुगतान किया जा रहा था और न ही उन्हें अपने घर लौटने दिया जा रहा था। उन्हें अपने परिजनों से भी बात करने की अनुमति नहीं थी।
विस्तारFollow Usआतंकी डॉ. आदिल अहमद की गिरफ्तारी के बाद कुछ संदिग्ध खुफिया एजेंसियों की रडार पर हैं। वर्ष 2017 से अब तक सहारनपुर को पांच बार उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। आखिरी बार 26 अक्तूबर 2023 में धमकी मिली थी। इससे पहले वर्ष 2017 व 2022 में एक-एक बार और 2018 में दो बार धमकी भरे पत्र मिले थे। आतंकी संगठन लश्कर-ए तैयबा का जिक्र किया गया था।
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बारां के अंता विधानसभा उपचुनाव के बाद छबड़ा से भाजपा विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने पार्टी द्वारा की गई उपेक्षा पर नाराजगी जताई है। उनकी यह नाराजगी वायरल हो रहे एक पत्र से सामने आई है जो उन्होंने भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखा था। पत्र में सिंघवी ने अपना दर्द बयां किया है कि उपचुनाव के दौरान उन्हें प्रचार सूची में शामिल नहीं किया गया, जबकि उनसे कनिष्ठ दो विधायकों के नाम सूची में रखे गए थे।
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