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💢ऑफर बोनस💢भोपाल के पं. खुशीलाल आयुर्वेदिक महाविद्यालय ने किडनी स्टोन (पथरी) के इलाज को लेकर बड़ा दावा किया है। महाविद्यालय में किए गए 90 दिन के शोध में सामने आया है कि आयुर्वेदिक काढ़े के नियमित सेवन से 73 प्रतिशत मरीजों को बिना ऑपरेशन और बिना लेजर इलाज के राहत मिली है। शोध के दौरान कई मरीजों में पथरी का आकार धीरे-धीरे कम हुआ, जबकि कुछ मामलों में पथरी पूरी तरह शरीर से बाहर निकल गई। यह शोध किडनी स्टोन से पीड़ित उन मरीजों पर किया गया, जो लंबे समय से दर्द, जलन और पेशाब संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। शोध के दौरान मरीजों को विशेष आयुर्वेदिक औषधियों से तैयार काढ़ा दिया गया। इसके साथ ही खानपान, जीवनशैली और पानी पीने को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए गए। उपचार शुरू होने के कुछ ही हफ्तों में अधिकांश मरीजों को दर्द से राहत मिलने लगी और पथरी से जुड़ी परेशानियां कम होती चली गईं।
️रिवॉर्ड्स,विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो में पिछले 10 वर्षों से आयोजित होने वाला खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का ग्यारहवां संस्करण 16 दिसंबर से शुरू होकर 22 दिसंबर तक आयोजित होगा।
दैनिक कमाई, सारआईफोन खरीदने के बाद फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर 70 हजार रुपए की ठगी हुई है। इस मामले में दो आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। बेमेतरा में सेकंड हैंड आईफोन खरीदने के नाम पर फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाया था।
चंबा। न्यायालय में तलाक लेने के बाद एक महिला की ओर से गुजारा भत्ते और पत्नी होने के दावे को लेकर व्यक्ति के खिलाफ न्यायालय में याचिका लगाने का मामला सामने आया है। इस मामले में परिवार न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश प्रीति ठाकुर की अदालत ने महिला की याचिका खारिज करते हुए पुन: दावा न करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने साफ किया कि तलाक के बाद महिला का पूर्व पति पर कोई अधिकार नहीं है।
Donald TrumpIranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीT20 WCRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिWest Bengal
विन वॉच, चंबा। 15 से 49 वर्ष के आयु वर्ग में एचआईवी/एड्स के मामले सबसे अधिक पाए गए हैं। यह बात जिला एड्स नियंत्रण अधिकारी डॉ. हरित पुरी ने कही। इस दौरान उन्हाेंने इस बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
क्लिक फ्रेंड्स छत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान, लोक संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा उत्सव 'बस्तर पंडुम' इस वर्ष 10 जनवरी 2026 से पूरे उत्साह और गरिमा के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, लोककला, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अनूठा प्रयास है।
वाराणसी ब्यूरोUpdated Sat, 10 Jan 2026 01:09 AM IST
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