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💢अल्ट्रा मोबाइल💢सारनजीबाबाद की शिक्षिका को वीडियो कॉल के माध्यम से डराया गया। डिजिटल अरेस्ट करके खातों में रकम ट्रांसफर करा ली गई। पुलिस ने तीन आरोपी पकड़ लिए हैं, जबकि उनके दो साथी अभी फरार हैं।
️सब्सक्राइब ऑनलाइन,मनीमाजरा। मौलीजागरां इलाके में रविवार रात उस समय तनाव फैल गया, जब कुछ लोगों ने पथराव कर मोहल्ले में खड़ी कई गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और जमकर तोड़फोड़ की। हालांकि शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह घटना किसी संगठित हमले के बजाय एक पारिवारिक विवाद से जुड़ी हुई थी। पथराव की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद हालात पर काबू पाया गया।
छतरपुर जिले में अप्रैल से नवंबर 2025 तक करीब 8 माह की अवधि में कुल 402 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस दौरान 64 बच्चों ने रास्ते में, 83 बच्चों की घर पर और 255 बच्चों की अस्पताल में डिलीवरी के बाद उपचार के दौरान दम तोड़ा। कुल 16,912 डिलीवरी में से 402 नवजातों की मृत्यु दर्ज की गई है।
पैसे, विस्तारFollow Usमध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई में गुरुवार शाम आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के जिला प्रचारक शिशुपाल यादव के साथ मारपीट की घटना के बाद नगर में तनाव फैल गया। बताया गया कि विवाद के बाद कुछ युवकों ने यादव पर हमला किया, जिससे वे घायल हो गए।
मुंगेली जिले के लोरमी ब्लॉक में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दो बुजुर्ग महिलाओं को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है। इस त्रुटि के कारण उनका नाम राशन कार्ड से हटा दिया गया है, जिससे वे राशन प्राप्त करने से वंचित हैं। 70 वर्षीय बैगा आदिवासी महिला सहबीन बैगा और सूरजा बाई को मृत माने जाने के कारण पिछले चार महीनों से राशन नहीं मिल पा रहा है।
सारRajasthan News : राजस्थान के सीकर निवासी 33 वर्षीय सुरेंद्र की संदिग्ध परिस्थितियों में अबूधाबी (यूएई) में हुई मृत्यु के 56 दिन बाद आखिरकार उनका शव शुक्रवार सुबह जयपुर पहुंचेगा। राष्ट्रपति भवन से लेकर विदेश मंत्रालय तक की कार्यवाही और दबाव के बाद शव को भारत लाने का रास्ता साफ हो सका।
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विस्तारFollow Usकभी खेतों की हरियाली से पहचाने जाने वाला झाड़सिरतोली गांव आज वीरान है। एक समय यहां 30 परिवार साथ रहते थे लेकिन अब पूरा गांव महज एक परिवार के छह लोगों की मौजूदगी पर टिका है। मूलभूत सुविधाओं की कमी ने लोगों को अपनी जन्मभूमि से दूर जाने को मजबूर कर दिया। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य की तलाश में ग्रामीण हल्द्वानी, दिल्ली और तहसील-जिला मुख्यालयों की ओर पलायन कर गए।
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