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💢विशेष वीडियो💢अल्मोड़ा। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर कुमाऊं की महिलाओं और देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में व्लॉगर ज्योति अधिकारी के खिलाफ अल्मोड़ा कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
️सब्सक्राइब क्लिक,सारकौन बनेगा करोड़पति की हॉट सीट तक पहुँचने वाली सरगुजा जिले की पहली महिला तथा छत्तीसगढ़ की पहली महिला शिक्षिका बन गई हैं। शो के जारी प्रोमो के अनुसार वे 31 दिसंबर और 1 जनवरी को महानायक अमिताभ बच्चन के सामने बैठकर खेलती नजर आएंगी।
दैनिक बोनस, वाराणसी ब्यूरोUpdated Wed, 07 Jan 2026 11:53 PM IST
आगरा। विधायक खेल स्पर्धा के तहत बरहन में हो रहे महामुकाबले में सोमवार को चौधरी क्रिकेट क्लब नगला दुर्ग सिंह व मलूपुरा क्रिकेट क्लब खंदौली के बीच 12-12 ओवर के मैच खेले गए। चौधरी क्रिकेट क्लब गला दुर्ग सिंह थाना बरहन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 12 ओवर में 133 रन बनाए। जवाब में 134 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी मलूपुरा क्रिकेट क्लब की टीम 111 रन ही बना सकी। इससे चौधरी क्रिकेट क्लब को 22 रन से विजयी घोषित किया गया। इस दौरान विनय धाकरे, धर्मेंद्र प्रधान, सत्यवीर सिंह, मनोज नौहरवार, नेत्रपाल चौधरी आदि खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया।
सारBaran News: छबड़ा रेलवे स्टेशन पर चलती मेमू ट्रेन में चढ़ते समय 65 वर्षीय महिला फिसलकर ट्रैक पर गिर गई। RPF जवान की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। महिला को सिर में चोट आई, प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें आगे भेज दिया गया।
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुरPublished by:अमन कोशलेUpdated Sun, 09 Nov 2025 07:09 PM IST
इंस्टेंट शेयर, संवाद न्यूज एजेंसी, बांदाUpdated Tue, 13 Jan 2026 12:06 AM IST
सर्वे लाइक विस्तारFollow Usजिम्मेदारी तो जट्टारी नगर पंचायत की है कि सभी रास्तों और गलियों में रात के समय प्रकाश रहे लेकिन नगर पंचायत ऐसा नहीं कर सकी। लिहाजा लोगों ने स्वयं से अपने-अपने घरों के बाहर बल्ब टांग रखे हैं ताकि रात के समय गली में रोशनी रहे और अंधेरे में गलियों में हादसे, घटनाओं से वह सुरक्षित रह सकें।
रिसीव ऑनलाइन, विस्तारFollow Usकहते हैं कि इंसान चला जाता है, लेकिन उसके कर्म अमर हो जाते हैं। राजस्थान के बालोतरा जिले से आई यह खबर इसी कथन को साकार करती है। महज पांच साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले भोमाराम ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में ऐसा काम कर दिया, जिसने तीन जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी दे दी। भोमाराम के माता-पिता ने गहरे दुख के बीच ऐसा साहसिक और मानवीय फैसला लिया, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।







