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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में इस साल चार दिन स्थानीय अवकाश के रूप में घोषित किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए आदेश जारी कर दिया है। इन दिनों शहर के सभी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। भोपाल में घोषित अवकाश में मकर संक्रांति, महानवमी और अनंत चतुर्दशी के साथ-साथ गैस त्रासदी की बरसी शामिल है। इन अवसरों पर सरकारी कामकाज प्रभावित रहेगा। आदेश के अनुसार, 14 जनवरी 2026, बुधवार को मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में छुट्टी रहेगी। 25 सितंबर, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी और 19 अक्टूबर, सोमवार को महानवमी के दिन भी सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। वहीं, 3 दिसंबर, बुधवार को भोपाल शहर में गैस त्रासदी की बरसी पर भी सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। इस प्रकार, भोपाल के निवासियों को इस साल कुल चार दिन सरकारी कार्यालयों से संबंधित कामकाज में अवकाश रहेगा।
कमेंट, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:तरुणेंद्र चतुर्वेदीUpdated Sat, 10 Jan 2026 04:59 PM IST
विस्तारFollow Usवनमंडल अंतर्गत कूप कटाई को लेकर हाल के दिनों में ग्रामीणों के बीच असमंजस और आपत्तियों की स्थिति बनी हुई थी। इसी संदर्भ में वन विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने कहा है कि कूप कटाई पूरी तरह शासन के प्रावधानों पर्यावरणीय नियमों और ग्रामसभा की प्रक्रिया के अनुरूप ही की जा रही है।
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ऑनलाइन, अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़Published by:शाहिल शर्माUpdated Sun, 11 Jan 2026 11:32 PM IST
साइन अप मोबाइल की स्क्रीन टूटने पर बच्चे ने खाया जहर- फोटो : credit
T20 WCविकसित भारत युवा नेतृत्व संवादकौन है अरिहा शाह?अंबरनाथ नगर परिषदयूनियन बजट 2026-27भोपाल के रहमान डकैत की पूरी कहानीखुदरा महंगाई दर में उछालJagdeep DhankharShikhar Dhawan Engagement'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...'
डाउनलोड साइन अप, गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार ने जेलों में बंद आजीवन कारावास के बंदियों को बड़ी राहत दी है। जेल विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद कुल 481 आजीवन दंडित बंदियों के मामलों पर विचार किया गया, जिनमें से 87 बंदियों को समयपूर्व रिहाई के लिए पात्र पाया गया है। वहीं, 394 बंदियों को निर्धारित शर्तें पूरी न होने के कारण अपात्र घोषित किया गया है। यह निर्णय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लिया गया है। राज्य सरकार ने अपने पूर्व आदेश के तहत गठित प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक प्रकरण में कानूनी प्रावधानों, बंदियों के आचरण, अपराध की पृष्ठभूमि और अन्य तथ्यों का गहन परीक्षण किया।







