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️सर्वे विज़िट,अनूपपुर के महाराजा मार्तंड महाविद्यालय में एबीवीपी छात्रों ने मूलभूत सुविधाओं की कमी और प्रिंसिपल की अनुपस्थिति को लेकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने लापता प्रिंसिपल के पोस्टर लगाए और 13 सूत्री मांगें सौंपीं। स्पोर्ट्स टीचर पर दुर्व्यवहार व धमकी के गंभीर आरोप लगे। दबाव में प्रिंसिपल पहुंचे, आंदोलन समाप्त हुआ।
विस्तारFollow Usअनूपपुर जिले के कोतमा स्थित महाराजा मार्तंड महाविद्यालय में छात्रों ने सोमवार को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। छात्रों ने प्रिंसिपल के लापता होने के पोस्टर कैम्पस की दीवारों और शहर के विभिन्न स्थानों पर पर चस्पा कर दिए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों का कहना है कि कॉलेज में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। प्रिंसिपल कॉलेज ही नहीं आते। इसके चलते व्यवस्था बिगड़ गई है। कॉलेज के दूसरे प्रोफेसर भी मनमानी पर उतर आए हैं। छात्रों ने 13 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा और इसके बाद अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
गेट कैश, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंजPublished by:शबाहत हुसैनUpdated Mon, 03 Nov 2025 07:20 PM IST
अंबेडकरनगर। स्वास्थ्य विभाग से 100 बेड का पंजीकरण कराकर नवीनीकरण न कराने वाले अस्पताल व नर्सिंग कॉलेज चलाने वाले नौ संस्थानों को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
ऑफर बोनस, सारबागेश्वर जिले में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। कपकोट के पिंडर घाटी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंचने से नलों में पानी जमने लगा है।
कमाई सब्सक्राइब विस्तारFollow Usबाड़मेर जिले में रात्रि चौपाल एक बार फिर ग्रामीणों के लिए राहत की वजह बनी। बुधवार को सर्द रात में जिला कलेक्टर टीना डाबी स्वयं जिले की भेडाणा ग्राम पंचायत पहुंची और घंटों ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। सर्दी के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीण चौपाल में एकत्र हुए। जहां उन्होंने अपनी समस्याओं को जिला कलेक्टर के सामने रखा। जिसे जिला कलेक्टर टीना डाबी ने गंभीरता से लेते हुए कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर ग्रामीणों को त्वरित राहत प्रदान की।
दैनिक ईज़ी, बारां के केलवाड़ा कस्बे की निकटवर्ती ग्राम पंचायत दांता में विधायक कोष से बने हाट बाजार में धांधली और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार द्वारा बनाए गए चबूतरों को पूरी तरह नकार दिया है। 10 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत होने के बावजूद भी मौके पर कोई नया ठोस निर्माण नहीं हुआ। महज पूर्व में बने चबूतरों की मरम्मत कर खानापूर्ति कर दी गई।







