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💢साइन अप💢सारआज शुक्रवार को बेमेतरा जिले के कठिया गांव में छत्तीसगढ़ बांस तीर्थ संकल्पना सम्मेलन का आयोजन हुआ। सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री दयालदास बघेल समेत जिले के जनप्रतिनिधि मौजदू थे।
️सुपर साइन अप,सारपेट्रोल पंप कर्मियों और एसडीएम के बीच हुई हाथापाई का वीडियो वायरल होने के बाद सरकार ने एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
नया ट्रांसफर, सारBihar:भागलपुर से जमालपुर तक 65 किमी की तीसरी लाइन का निर्माण भी 1100 करोड़ की लागत से होना है। इसके लिए भी भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई जारी है। नाथनगर अंचल के राघोपुर एवं नूरपुर इलाके में मापी का कार्य हाल में कराया गया।
भिवानी। शहर का दायरा और आबादी बढ़ने के साथ ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांटों पर दूषित पानी की निकासी का दबाव बढ़ गया है। इतना ही नहीं औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए 18 करोड़ रुपये से बने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट भी पर्यावरण एनओसी नहीं मिलने के कारण करीब दो साल से खामोश पड़ा है। बिना ट्रिटमेंट के दूषित पानी भिवानी-घग्गर ड्रेन में छोड़ा जा रहा है जिससे किसान सिंचाई से भी तौबा कर रहे हैं।
छतरपुर जिले में अप्रैल से नवंबर 2025 तक करीब 8 माह की अवधि में कुल 402 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस दौरान 64 बच्चों ने रास्ते में, 83 बच्चों की घर पर और 255 बच्चों की अस्पताल में डिलीवरी के बाद उपचार के दौरान दम तोड़ा। कुल 16,912 डिलीवरी में से 402 नवजातों की मृत्यु दर्ज की गई है।
सिल्वर कमाई, विस्तारFollow Usजिले के बमीठा थाना क्षेत्र में एनएच-39 पर ग्राम चुरारन के पास नीलम ढाबा के नजदीक एक नवजात बच्ची को जन्म के बाद शॉल में लपेटकर नाल सहित पुलिया के नीचे फेंक देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
रिवॉर्ड्स वाराणसी ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 01:30 AM IST
अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतराPublished by:अनुज कुमारUpdated Mon, 22 Dec 2025 08:15 PM IST
डाउनलोड लॉग इन, विस्तारFollow Usइंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने मध्यप्रदेश की जल गुणवत्ता जांच व्यवस्था की गंभीर पोल खोल दी है। इस घटना के बाद जांच की सुई सीधे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग पर टिक गई है, जो प्रदेश में पेयजल और औद्योगिक जल की गुणवत्ता जांच का जिम्मा संभालता है। हैरानी की बात यह है कि प्रदेशभर में 155 प्रयोगशालाएं होने के बावजूद पूरे मध्यप्रदेश में सिर्फ तीन नियमित केमिस्ट पदस्थ हैं।







