शेयर कैश
अर्न साइन अप
कमेंट डाउनलोड, Inc
पॉइंट्स ऑफर
💢गेट💢न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांकाPublished by:भागलपुर ब्यूरोUpdated Wed, 24 Dec 2025 12:20 PM IST
️गेम रिसीव,मॉडल संस्कृति-पीएमश्री स्कूलों में नियुक्ति के लिए 12 जनवरी तक अपलोड कर सकेंगे दस्तावेज
सारअंकिता भंडारी केस से जुड़ा एक ऑडियो वायरल होने के बाद पूरे प्रदेश में हलचल मच गई थी। इसके बाद बहादराबाद व झबरेड़ा थाने में सुरेश राठौर व उर्मिला सनावर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई।
कम्पलीट ऐप, विस्तारFollow Usमध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की लहार स्थित बहुचर्चित कोठी से जुड़ा मामला सामने आया है। इस प्रकरण पर चल रही सुनवाई में हाईकोर्ट ने डॉ. गोविंद सिंह की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि इस विवाद की सुनवाई का अधिकार सिविल न्यायालय को है और राजस्व विभाग द्वारा की गई नापतौल को सही ठहराया गया है।
सारभिंड में एक साइबर ठग ने टीआई को ही ठगने की कोशिश की, मगर उसकी चालाकी उलटी पड़ गई। खुद को बैंक अधिकारी बताने वाले ठग की लोकेशन टीआई ने ट्रेस कर ली, जो झारखंड के जामताड़ा की निकली। हालांकि जब तक पुलिस ठग को पकड़ने पहुंची वो वहां से फरार हो चुका था।
इनाम, कानपुर। गोविंदनगर थाना क्षेत्र के गुजैनी सी ब्लॉक में ब्रजेश कुमार यादव (45) शनिवार दोपहर बिस्तर पर मृत मिले। वह कन्नौज के छिबरामऊ में बिजली विभाग में बाबू के पद पर तैनात थे। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मूलरूप से बनारस के मुगलसराय के रहने वाले ब्रजेश के परिवार में पत्नी गायत्री, बेटी रिमझिम, बेटा युवान, मां गायत्री व छोटा भाई अभिषेक हैं। पिता जगदीश का बीते साल सितंबर में देहांत हो गया था। अभिषेक ने बताया कि ब्रजेश शुक्रवार को कार से गुजैनी आए थे। देर रात खाना खाने के बाद कमरे में सोने चले गए। शनिवार की सुबह वह कमरे में मृत मिले। गोविंदनगर इंस्पेक्टर रीकेश कुमार सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट न होने पर बिसरा सुरक्षित किया गया है। प्रथम दृष्टया हार्टअटैक से मृत्यु की आशंका जताई जा रही है। संवाद
साइन अप वेरिफाई कमेंटX😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
चंबा। परेल के पास रावी नदी के किनारे न तो लोक निर्माण विभाग और न ही पंचायत सड़क का निर्माण करवा रही है तो आखिरकार दो से तीन मशीनें लगाकर सड़क निर्माण करना अब पहेली बन गया है। हैरानी की बात तो यह है कि इसके लिए न तो वन विभाग की अनुमति ली गई है और न ही प्रशासन को इसके बारे में पता है। हालांकि अब अमर उजाला में खबर प्रकाशित होते ही प्रशासन ने इस मामले की जांच करवाएगा।
विशेष रिसीव, अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुरPublished by:अनुज कुमारUpdated Thu, 11 Dec 2025 09:53 PM IST







