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💢ऑफर💢विस्तारFollow Usमनरेगा में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने शनिवार से देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत कर दी है। इसी क्रम में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत काम के अधिकार की रक्षा को लेकर अजमेर के सर्किट हाउस में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस वार्ता को कांग्रेस संगठन प्रभारी चेतन डूडी एवं अजमेर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने संबोधित किया। इस अवसर पर आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ और पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती भी मौजूद रहे।
️अल्ट्रा कैश,सारआगरा मेट्रो 90 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। इसके लिए पहला ट्रायल मन:कामेश्वर से आईएसबीटी तक होगा। इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
विस्तारFollow Us'जिन्हें नसीब नहीं छत, उनकी करें बात, सर्द हवाओं में खुले आसमां तले गुजर रही रात' किसी कवि की कविता की यह पंक्तियां बांसवाड़ा जिले में उन लोगों पर सटीक बैठ रही है, जो बेघर और जरूरतमंद हैं। सर्द हवाओं में जरूरतमंद ठिठुरने को मजबूर हैं, लेकिन जिला प्रशासन और नगर परिषद ने अभी तक ऐसे परिवारों को राहत देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।
कमेंट, हसनपुर। नगर के कनेटा रोड पर चल रहे दो रोजा तब्लीगी इज्तिमा का रविवार को समापन हो गया। इस दौरान मुल्क व कौम की तरक्की के लिए दुआ की गई।
😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
कभी बंदूक थामने को मजबूर हुई सुनीता अब नई ज़िंदगी की शुरुआत कर रही है। मंगलवार को उसने तीन साल बाद अपने माता-पिता को गले लगाया तो आंखों से आंसू छलक पड़े, पर चेहरे पर सुकून की मुस्कान थी। यह भावुक मुलाकात बालाघाट पुलिस ने आयोजित कराई।
खुदरा महंगाई दर में उछाल'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...'India-US Tiesपीएम मोदी कार डिप्लोमेसीविवेकानंद यूथ अवॉर्डWest Bengal Politicsबैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलावदालमंडी में बुलडोजर एक्शनModi-Merz Meet LIVEIND vs NZ
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डायमंड कम्पलीट, सारपीसीसी सचिव ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में किए गए हालिया बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर खतरा बताया है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खनन की अनुमति दी है। ऐसे में 100 मीटर से नीचे के भूभाग को अब अरावली पहाड़ी नहीं माना जाएगा।







