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️रजिस्टर विज़िट,गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
डूंगरपुर से बाल श्रम के लिए गुजरात ले जाए जा रहे 22 बाल श्रमिकों को रेलवे पुलिस, चाइल्ड लाइन और एक स्वयंसेवी संस्था ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए मुक्त कराया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब चित्तौड़गढ़ से गुजरात के असारवा जाने वाली रेल में सभी बच्चे बैठे थे। मामले में 3 दलालों को हिरासत में लिया गया है।
कमेंट ऐप, अमर उजाला नेटवर्क, बालोदPublished by:अनुज कुमारUpdated Sat, 03 Jan 2026 10:55 PM IST
विस्तारFollow Usपूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह एवं जिला कांग्रेस सरगुजा के जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने शनिवार को राजीव भवन अंबिकापुर में पत्रकार वार्ता करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पारित कर ग्रामीण मजदूरों को काम की संवैधानिक गारंटी दी थी, जिससे अब तक 180 करोड़ से अधिक कार्यदिवस सृजित हुए और 10 करोड़ से ज्यादा परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ।
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगरUpdated Mon, 12 Jan 2026 10:55 PM IST
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अल्मोड़ा के मुनस्यारी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण राजमा की खेती निचली ऊंचाई से उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओर शिफ्ट हो गई है, जिससे इसकी पैदावार और गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
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