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बीजापुर में कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बड़े बदलाव कर गरीबों के काम करने और मजदूरी पाने के अधिकार को छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और मांग करने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब यह अधिकार समाप्त हो गया है और सरकार की मर्जी से काम मिलेगा।
डिपॉजिट मोबाइल, विस्तारFollow Usवैशाली जिले को नया पुलिस अधीक्षक मिल गया है। विक्रम सिंहाग ने सोमवार को औपचारिक रूप से वैशाली के नए एसपी के रूप में पदभार ग्रहण किया। पदभार संभालते ही उन्होंने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दीं। एसपी विक्रम सिंहाग ने कहा कि जिले में अपराध नियंत्रण उनकी सबसे पहली प्राथमिकता होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़Published by:शाहिल शर्माUpdated Sat, 10 Jan 2026 10:36 PM IST
सारराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं को योग, पुस्तक पढ़ने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
मोबाइल, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी प्रमुख अमित बघेल पर कथित हेट स्पीच का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी और पुलिस जांच की निगरानी समेत अन्य मांगें करते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि चल रही आपराधिक जांच में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी का निर्देश दिया जा सकता है। इसके अलावा जांच के तरीके या वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी जैसे निर्देश देना आपराधिक जांच के माइक्रो मैनेजमेंट जैसा होगा, जो कोर्ट के दायरे में नहीं आता।
कलेक्ट Budget 2026खुदरा महंगाई दर में उछालShikhar Dhawan Engagement'मैं मुंबई आऊंगा, हिम्मत है तो मेरे पैर...'डिलीवरी बॉय बने राघव चड्ढाIND vs NZसीएम रेखा का बयानअंबरनाथ नगर परिषदIndia-US Tiesपीएम मोदी कार डिप्लोमेसी
विस्तारFollow Usराजधानी भोपाल के नगर निगम संचालित स्लॉटर हाउस से जुड़े एक गंभीर मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पशु चिकित्सक के प्रमाणपत्र के आधार पर करीब 26 टन मांस मुंबई भेजा गया था, जिसकी जांच में बाद में गोमांस होने की पुष्टि हुई है। हैरानी की बात यह है कि दस्तावेजों में इसे भैंस का मांस बताया गया था। जानकारी के अनुसार नगर निगम के पशु चिकित्सक द्वारा जारी प्रमाणपत्र के आधार पर मांस को स्लॉटर हाउस से बाहर ले जाने की अनुमति दी गई। दिसंबर 2025 के मध्य में जारी इस प्रमाणपत्र में यह उल्लेख किया गया था कि तय मानकों के अनुसार पशुओं का वध किया गया है और मांस मानव उपभोग के लिए उपयुक्त है। इसी आधार पर मांस को फ्रीज कर कंटेनरों में भरकर मुंबई रवाना किया गया। अब इस मामले में भोपाल नगर निगम की भूमिका ही सवालों के घेरे में हैं।
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