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💢कमेंट💢सारकैटरिंग काम के लिए गुजरात ले जाए जा रहे 22 बाल श्रमिकों को रेलवे स्टेशन से रेस्क्यू किया गया। इस दौरान मौके से तीन दलालों को भी हिरासत में लिया गया, जिनसे पूछताछ जारी है। बच्चों को बाल कल्याण समिति के आदेश पर बाल संप्रेषण गृह भेजा गया है।
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गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवरPublished by:अलवर ब्यूरोUpdated Sat, 03 Jan 2026 03:57 PM IST
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ईज़ी पैसे सारपुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत छत्तीसगढ़, हरियाणा, यूपी, बिहार, कर्नाटक, केरल और अन्य राज्यों से किशोरियों को दस्तयाब किया है। हालांकि कई मामले अभी भी लंबित हैं।
विस्तारFollow Usपंजाब के गांवों और शहरों में घर के आंगन में दहकती लोहड़ी केवल लकड़ियों का अलाव नहीं है। यह उस सामाजिक चेतना का जीवंत प्रतीक है जिसमें वीरता, विद्रोह, किसान का संघर्ष और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की लौ सदियों से जलती आ रही है।
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