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💢अतिरिक्त रजिस्टर💢विस्तारFollow Usराजस्थान की लोक परंपराएं अपने संवेदनात्मक जुड़ाव और पारिवारिक स्नेह के लिए जानी जाती हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है ‘मायरा’, जिसमें भाई अपनी बहन के बच्चों की शादी में प्रेम, आदर और समर्पण के भाव से उपहार, वस्त्र और धन लेकर पहुंचते हैं। इस परंपरा की झलक बीकानेर जिले के नोखा क्षेत्र के सीनियाला गांव में देखने को मिली, जहां भाइयों ने मायरे में ऐसा योगदान दिया कि यह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
️इनवाइट,विस्तारFollow Usइंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 23 लोगों की मौत के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद सड़कों पर उतरे और राजधानी भोपाल में पानी की हकीकत का रियलिटी टेस्ट किया। निरीक्षण के दौरान नलों से कीड़े युक्त दूषित पानी निकलता देख कांग्रेस ने नगर निगम और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। जीतू पटवारी ने दक्षिण-पश्चिम विधानसभा के वार्ड क्रमांक 25 (बाणगंगा क्षेत्र) का स्थल निरीक्षण किया। इस दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबीस्ता जकी मौजूद रहीं। पटवारी ने कहा कि सीवर लाइन के समानांतर पेयजल पाइपलाइन बिछाई गई है, जिसके चलते नलों में गंदा और बदबूदार पानी पहुंच रहा है।
Donald TrumpIranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीT20 WCRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?बीवी ने मरवा डाला पतिWest Bengal
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सारआप के सरपंच जरमल सिंह की 4 जनवरी की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गोली मारने वाले आरोपी सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णियाPublished by:पूर्णिया ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 08:17 AM IST
अस्पताल में भर्ती कराया गया नवजात शिशु- फोटो : अमर उजाला
इंस्टेंट, बीजापुर जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा और विकास को नई दिशा देते हुए फरसेगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम डोडीमरका में बीते दिनों नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप की स्थापना सफलतापूर्वक की गई। माओवादियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से डीआरजी, जिला बल एवं छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 7वीं वाहिनी ‘बी’ समवाय की संयुक्त टीमों द्वारा यह कैंप स्थापित किया गया।
डिपॉजिट बोनस सारबीजापुर नगर की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित जरूरत बन चुकी बायपास सड़क आज भी केवल कागज़ों और फाइलों तक सीमित है। बीते 12 वर्षों से बीजापुर बायपास सड़क का प्रस्ताव सरकारी दफ्तरों में धूल खा रहा है।
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