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💢मासिक सब्सक्राइब💢युवक और युवती का फाइल फोटो।- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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शेयर कमेंट, सारलांजी क्षेत्र के चौंदाटोला गांव में छत्रपति संभाजी महाराज की प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद गहरा गया। शुक्रवार रात प्रतिमा स्थल के कॉलम तोड़े जाने से कुनबी और मरार समाज आमने-सामने आ गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात नियंत्रित किए और गांव में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
बाराबंकी शहर के मुंशीगंज मोहल्ले में दुकान के पास बेसहारा व्यक्ति की तरह से सोने के बाद शातिर चोर ने कटर से शटर काट डाला और 18 लाख के मोबाइल उड़ा दिए। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड हो गई। सुबह घटना की जानकारी होने पर पुलिस ने दुकान से जाने वाले हर रास्ते व मोहल्लों के करीब 80 कैमरे खंगाले तो दूसरे मोहल्ले में पेड़ों के बीच और जमीन में छिपाकर रखी गईं दोनों बोरियां में करीब 15 लाख रुपये कीमत के मोबाइल फोन मिल गए।
सारजिला देहाती प्रधान राजविंदर सिंह राजा लदेह ने कहा कि आप नेता ने सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत की है, अब यह मामला सिर्फ राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक संगठनों और गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के विरोध का रूप ले चुका है।
औरैया। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के आह्वान पर 40 दिवसीय मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत रविवार को जनपद में इस आंदोलन की शुरूआत की गई। जिला कोऑर्डिनेटर रामानंद चौबे व जिलाध्यक्ष सरिता दोहरे की मौजूदगी में शहीद पार्क में उपवास व विरोध प्रदर्शन किया गया।
डिपॉजिट, सारSaharanpur News: जिले में पांच बार डाक के माध्यम से पत्र भेजकर धमकी दी जा चुकी है। सहारनपुर के अलावा अंबाला, पानीपत, सोनीपत, चंडीगढ़, भिवानी, मेरठ और गाजियाबाद स्टेशनों पर भी धमाका करने की चेतावनी दी गई।
इनाम विस्तारFollow Usमकर संक्रांति का पर्व, जो पारंपरिक रूप से खिचड़ी के बिना अधूरा सा लगता है, इस वर्ष एक विशेष संयोग के कारण अपने पारंपरिक स्वरूप में नहीं मनाया जा सकेगा। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ-साथ षटतिला एकादशी का भी पर्व पड़ रहा है, जो 19 वर्षों बाद ऐसा संयोग है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल से बनी किसी भी सामग्री का सेवन वर्जित होता है।
विस्तारFollow Usप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आजाद सिंह राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्वतों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सदियों पुरानी अरावली पहाड़ियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राठौड़ के अनुसार अरावली केवल पहाड़ों की शृंखला नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।
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