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💢क्लिक💢अंबेडकरनगर। नगरपालिका परिषद अकबरपुर की ओर से राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया। इस दौरान लोरपुर वार्ड में कूड़ा पृथक्करण पर लोगों का जागरूक किया गया। साथ ही गंदगी न फैलाने का संकल्प भी दिलाया गया।
️गेट विन,Magh Mela : 11 वर्ष बाद मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का महासंयोग, 14 जनवरी को स्नान का पुण्यकाल
फोटो-36-काशीराम कॉलोनी में टूटे पड़े पाइप से बहता पानी और पास ही बिखरी गंदगी। संवाद- फोटो : टूंडला में बरामद बच्ची को उसकी मां को सौंपती जीआरपी व आरपीएफ पुलिस
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अमेठी। मकर संक्रांति पर्व पर प्रयागराज माघ मेले में स्नान करने जाने वाले श्रद्धालुओं को इस बार बड़ी राहत मिलने जा रही है। भारी भीड़ और परिवहन की परेशानी को देखते हुए अमेठी रोडवेज डिपो ने विशेष बस सेवा की व्यवस्था की है। 12 से 16 जनवरी तक अमेठी डिपो से प्रतिदिन 10 अतिरिक्त बसें प्रयागराज के लिए चलाई जाएंगी, जिससे श्रद्धालुओं को सीधी और सुगम यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।
कमेंटकमेंटX😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
मासिक पॉइंट्स, महिलाओं से अच्छी बचत कोई नहीं कर सकता। वह घर का बजट इतनी समझदारी से बनाती हैं कि सारे खर्चे निकालने के बाद भी हर महीने छोटी-मोटी बचत कर ही लेती हैं। इसी बचत को सही जगह पर निवेश कर वह बढि़या रिटर्न भी पा सकती हैं। अमर उजाला के स्त्री शक्ति समृद्धि जैसे कार्यक्रम महिलाओं को निवेश के लिए जागरूक करने के साथ दिशा भी दे रहे हैं। यह विचार महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह ने अमर उजाला बोनस और केनरा रोबेको म्यूचुअल फंड की ओर से निवेश के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देने के लिए आयोजित कार्यशाला में व्यक्त किए।
डायमंड इनाम विस्तारFollow Usछत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के भटगांव थाना के सामने छत्तीसगढ़ किसान सभा और आदिवासी एकता महासभा ने संयुक्त रूप से एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम नायब तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए आदिवासियों और किसानों की विभिन्न मांगों को पूरा करने की मांग की।
सब्सक्राइब ऑनलाइन, विस्तारFollow Usअल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।







