वीडियो स्टूडेंट
डायमंड विन
मासिक फ्रेंड्स, Inc
छोटा सर्वे
💢सिल्वर विन💢कहते हैं कि इंसान चला जाता है, लेकिन उसके कर्म अमर हो जाते हैं। राजस्थान के बालोतरा जिले से आई यह खबर इसी कथन को साकार करती है। महज पांच साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले भोमाराम ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में ऐसा काम कर दिया, जिसने तीन जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी दे दी। भोमाराम के माता-पिता ने गहरे दुख के बीच ऐसा साहसिक और मानवीय फैसला लिया, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।
️रजिस्टर बोनस,
बांदा। झांसी से अस्थियां लेकर प्रयागराज जा रही सवारियों से भरी बोलेरो ने स्कूल जा रहीं तीन महिलाओं को टक्कर मार दी। इनमें से एक महिला बोलेरो में फंसकर करीब 50 मीटर तक घिसट गईं। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने बांदा-प्रयागराज हाईवे जाम कर दिया। बोलेरो सवार लोगों के साथ मारपीट की। दो घंटे तक जाम लगा रहा। बाद में पहुंचे सीओ बबेरू, नायब तहसीलदार व कोतवाली इंस्पेक्टर आक्रोशित परिजनों को समझाकर जाम खुलवाया।
स्टूडेंट कूपन, सारBarmer News: शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने विधायकों के स्टिंग ऑपरेशन पर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि विधायक निधि जनता की अमानत है और टैक्सपेयर्स के पैसे का उपयोग केवल जनहित में ही होना चाहिए। साथ ही भाटी ने राज्य सरकार की दो साल की उपलब्धियों पर भी तंज कसा।
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइचUpdated Sun, 11 Jan 2026 01:40 AM IST
बलरामपुर। जिले की सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल की गई है। राप्ती मुख्य नहर पर निर्मित सायफन की क्षतिग्रस्त बेड लाइनिंग (नहर के किनारे की सुरक्षा परत) के पुनर्निर्माण को मंजूरी मिल गई है। इस कार्य पर करीब 74.60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना के पूरा होने से नहर की मजबूती बढ़ेगी और जल प्रवाह अधिक सुचारु हो सकेगा।
इनाम, खड़े वाहनों से हो रही पेट्रोल-डीजल की चोरी (सांकेतिक तस्वीर)- फोटो : AI Image- Freepik
पैसे
कैसरगंज। ग्राम पंचायत बदरौली स्थित एक निजी विद्यालय में सोमवार को सीढ़ियों से छत पर जा रहे छात्र पर दीवार गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना से विद्यालय में अफरातफरी का माहौल रहा।
कूपन ऑफर, विस्तारFollow Usअल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।







