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💢वीआईपी ऐप💢विस्तारFollow Usइलाहाबाद हाईकोर्ट में वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने की वैज्ञानिक सर्वे की मांग में दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई स्थगित हो गई। अब अगली सुनवाई तीन जनवरी को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने राखी सिंह की याचिका पर दिया है। याचिकाकर्ता राखी सिंह ने का कहना है कि वजूखाने के सर्वे से विवादित धार्मिक स्थल की धार्मिक चरित्र की पहचान हो सकेगी। वहीं, मुस्लिम पक्ष की ओर से सर्वे का विरोध किया जा रहा है। हालांकि, सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पूजास्थल अधिनियम व ज्ञानवापी के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका लंबित है। ऐसे में कोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर अगली तिथि नियत कर दी।
️डिस्काउंट कमेंट,नहर में कूदी महिला को बचाती पुलिस- फोटो : अमर उजाला
छावनी के जीएमएन कॉलेज में रन फॉर स्वदेशी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कॉलेज
रिसीव, पोस्टमार्टम के बाद बुजुर्ग का शव उनके पैतृक गांव मेजा के गौरा पौसिया लाई पहुंचा तो चीख-पुकार मच गई। सोमवार को सिरसा के छतवा गंगा घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
विस्तारFollow Usइलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के कथित दुरुपयोग और पुलिस शक्तियों के मनमाने इस्तेमाल पर नाराजगी जताई है। इस संबंध में मांगी गई जानकारी हलफनामे में न देने पर कोर्ट ने राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने दिया है।
सारमलाजखंड थाना क्षेत्र के भड़गांव गांव में बेटे ने काम नहीं करने पर डांट खाने से नाराज होकर बांस के डंडे से पिता की हत्या कर दी। आरोपी वारदात के बाद फरार हो गया। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी की तलाश जारी है।
कलेक्ट ऑफर, Tariff Threatबर्फीली हवाओं ने बढ़ाई कंपकंपीPrayagrajUSविक्रमादित्य सिंह की फेसबुक पर टिप्पणीMaharashtraDonald Trumpसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालRCB vs UPIran
बोनस पॉइंट्स न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगर मालवाPublished by:अमर उजाला ब्यूरोUpdated Sun, 03 Aug 2025 08:59 PM IST
कमेंटकमेंटX😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
बड़ा बोनस, विस्तारFollow Usप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव आजाद सिंह राठौड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पर्वतों की परिभाषा में हाल ही में किए गए बदलाव पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय सदियों पुरानी अरावली पहाड़ियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। राठौड़ के अनुसार अरावली केवल पहाड़ों की शृंखला नहीं, बल्कि उत्तर-पश्चिमी भारत की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण से किसी भी प्रकार का समझौता आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा।







