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💢ऑफर कमेंट💢न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवरPublished by:अलवर ब्यूरोUpdated Sat, 03 Jan 2026 03:57 PM IST
️विन,बाराबंकी। अमेठी जिले से किशोर का अपहरण कर बाराबंकी में बंधक बनाकर 10 लाख रुपये की फिरौती वसूलने की तैयारी थी। फिरौती मांगे जाने से पहले ही किशोर ने साहस का परिचय देते हुए खुद को आजाद करा लिया। साथ ही उसकी सक्रियता से ग्रामीणों ने एक बदमाश को भी पकड़ लिया। अपहरण का मास्टर माइंड किशोर का पड़ोसी निकला। पुलिस ने रविवार को पूरी साजिश का खुलासा किया। इसमें शामिल तीन आरोपी जेल भेज दिए गए।
डिस्काउंट, -सिरसली गांव के वैदिक निकेतन धाम में चार दिवसीय महायज्ञ शुरू
जिले के नलखेड़ा में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर की कीमती भूमि को लेकर हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसके बाद शुक्रवार रात को पुलिस प्रशासन और अन्य विभागों की टीम मौके पर पहुंची। जेसीबी की मदद से जमीन पर किए गए अतिक्रमण को हटा दिया गया। कार्रवाई देर रात तक चली और परिसर में भीड़ लगी रही।
सारबालाघाट में नक्सलवाद को बड़ी सफलता मिली है। जिले के अंतिम दो हार्डकोर माओवादी दीपक उर्फ मंगल उइके और रोहित ने सीआरपीएफ कैंप में आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों पर कुल 43 लाख का इनाम था। लगातार सर्चिंग, ड्रोन सर्विलांस और सप्लाई लाइन तोड़ने से नेटवर्क कमजोर हुआ और अब बालाघाट पूरी तरह माओवादी मुक्त हो गया है।
रिसीव, सारइलाहाबाद हाईकोर्ट में वाराणसी स्थित ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने की वैज्ञानिक सर्वे की मांग में दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई स्थगित हो गई। अब अगली सुनवाई तीन जनवरी को होगी।
अर्न ट्रांसफर विस्तारFollow Usपूजा पाठ का ढोंग कर गड़ा धन निकालने के नाम पर 40 हजार रुपये नगद एवं 21 तोला सोने की ठगी के मामले में शामिल आरोपी को अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी द्वारा अंबिकापुर में घटना करने के पश्चात थाना शंकरगढ़ मे घटना कारित किया गया था। जानकारी के मुताबिक जगदीश विश्वकर्मा आत्मज स्व. छट्टु विश्वकर्मा उम्र 52 वर्ष निवासी केदारपुर सहेली गली अम्बिकापुर थाना अम्बिकापुर के द्वारा संजय मिश्रा एवं अन्य साथियों द्वारा पूजा पाठ कर गड़ा धन निकालने के नाम पर 40,000/- रूपये नगद एवं 21 तोला शुद्ध सोना का बिस्किट की ठगी कर फरार होने के संबंध में थाना अम्बिकापुर में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना किया गया।
रिवॉर्ड्स कम्पलीट, विस्तारFollow Usकहते हैं कि इंसान चला जाता है, लेकिन उसके कर्म अमर हो जाते हैं। राजस्थान के बालोतरा जिले से आई यह खबर इसी कथन को साकार करती है। महज पांच साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले भोमाराम ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में ऐसा काम कर दिया, जिसने तीन जरूरतमंद लोगों को नई जिंदगी दे दी। भोमाराम के माता-पिता ने गहरे दुख के बीच ऐसा साहसिक और मानवीय फैसला लिया, जो पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।







