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💢कैश इनाम💢अल्मोड़ा में उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी की प्रसिद्ध राजमा पर जलवायु परिवर्तन और मौसम का असर पड़ा है। एक दशक पहले तक जहां 1450-1800 मीटर की ऊंचाई पर राजमा की खेती होती थी, वहीं अब वर्तमान में 1800-2400 मीटर की ऊंचाई पर इसकी पैदावार हो रही हैं। एसएसजे परिसर अल्मोड़ा, कुमाऊं विवि और गढ़वाल केंद्रीय विवि के संयुक्त शोध में इस बात का खुलासा हुआ है।
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आंवला। किसानों ने इफको पर वादाखिलाफी और भूदाताओं को रोजगार नहीं देने का आरोप लगाया है। इसको लेकर सोमवार को एसडीएम कार्यालय में भाकियू टिकैत, इफको प्रतिनिधि व तहसीलदार के बीच काफी देर तक वार्ता हुई। सभी पक्षों को सुनने के बाद अब अगली बैठक दो सप्ताह बाद होगी।
पॉइंट्स, सारअब एसआईआर से जुड़े काम के लिए बीएलओ से संपर्क करना आसान होगा। बस चुनाव आयोग की बुक-ए-कॉल सेवा पर जाकर अपनी रिक्वेस्ट दर्ज कराएं। रिक्वेस्ट दर्ज होने के मात्र 48 घंटे के भीतर संबंधित बीएलओ मतदाता को फोन कर आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
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लालबर्रा थाना पुलिस ने दर्ज किया मामला- फोटो : अमर उजाला
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कलेक्ट रिवॉर्ड्स विस्तारFollow Usकरीब दो हफ्तों से हाड़ कंपाने वाली ठंड और घने कोहरे की चादर में लिपटे अलीगढ़ के लोगों के लिए 10 जनवरी की सुबह एक नई उम्मीद लेकर आई। 12 दिनों के लंबे इंतजार के बाद धूप निकलने पर लोगों को ठिठुरन से राहत मिली। 24 घंटे के अंदर न्यूनतम तापमान में 3.6 और अधिकतम में 6.2 डिग्री की वृद्धि हुई। यह राहत धूप खिलने और बर्फीली हवाओं की गति थमने के कारण मिली है। 11 जनवरी को भी सुबह से ही धूप खिली रही।
विस्तारFollow Us73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।
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