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💢विन ऑफर💢दबतोरी में लगे जग आरोग्य मेला में मरीजों की जांच कर दवाएं दी गई। संवाद
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सूरजपुर जिले के रामानुजनगर में एक प्राइवेट स्कूल में केजी-टू के छात्र को होमवर्क नहीं करने पर टीचर ने घंटों पेड़ से लटकाए रखा। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पेरेंट्स का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में परिजनों ने स्कूल के बाहर हंगामा कर दिया।
नया विन, सारबीजापुर में भारतीय जनता पार्टी ने संगठन विस्तार और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बीजापुर जिले में महिला मोर्चा की नई जिलाध्यक्ष के रूप में माया झाड़ी की नियुक्ति की है।
सारबूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में शिकारियों की सक्रियता सामने आई है। भीमलत बांध के पास काला कुआ क्षेत्र में एक युवा नर पैंथर जंगल में लगाए गए फंदे में फंसकर घायल हो गया।
सारग्रामीण राम पोटाम जंगल जाते समय माओवादियों द्वारा पहले से लगाए प्रेशर आईईडी विस्फोट की चपेट में आ गया, जिससे उसके पैर में गंभीर चोट आई। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्चिंग शुरू कर दी है।
विस्तारFollow Usअररिया जिले के फारबिसगंज स्थित शगुन बैंक्विट हॉल में बिहार सरकार के उद्योग एवं पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बिहार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार सड़क, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में एक साथ काम कर रही है।
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विथड्रॉ गेट चरखी दादरी। पहले मनरेगा योजना में काफी भ्रष्टाचार होता था। जिसकी शिकायतें लगातार मिलती थीं। नई व्यवस्था लागू होने से जहां भ्रष्टाचार पर पूरी तरह से अंकुश लगेगा। वहीं वीबी-जी-राम-जी योजना वर्ष 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी। यह बात भिवानी-महेंद्रगढ़ क्षेत्र से लोकसभा सांसद धर्मबीर सिंह ने शनिवार को दादरी में विधायक सुनील सांगवान के निवास स्थान पर पत्रकारों से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना नहीं, बल्कि योजना को और अधिक प्रभावी बनाना है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान इस योजना के कई बार नाम बदले गए हैं।
सारसाजा थाना प्रभारी टीआई सत्यप्रकाश उपाध्याय ने बताया कि प्रकरण में विवेचना के दौरान आरोपी अश्वनी सतनामी को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर उसने अपना अपराध स्वीकार किया।
कलेक्ट, सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल दी है। बड़े-बड़े दावों के बावजूद, सुदूर आदिवासी इलाकों में जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। 21वीं सदी में भी, कागजों पर हाईटेक व्यवस्था के बावजूद, कई जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं आज भी खाट और कंधों के सहारे ही संचालित हो रही हैं।







