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💢साइन अप वीडियो💢सारBihar:शेखपुरा जिले में नल-जल योजना के तहत पंप ऑपरेटर को न्यूनतम मजदूरी नहीं देने पर श्रम विभाग ने ठेकेदार पर बड़ी कार्रवाई की है। बकाया 1.90 लाख रुपये के बदले दस गुना जुर्माना लगाते हुए 19.95 लाख रुपये भुगतान का आदेश दिया गया है।
️क्लिक ऐप,न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भिंडPublished by:अमर उजाला ब्यूरोUpdated Wed, 15 Oct 2025 07:48 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 10:34 PM IST
ऑफर फ्री, IranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालT20 WCबीवी ने मरवा डाला पतिRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरWest Bengalयूपी
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़Published by:शाहिल शर्माUpdated Mon, 12 Jan 2026 07:01 PM IST
सारSchool Students Protest: भीलवाड़ा के रामपुरिया स्कूल में प्रिंसिपल विवेक कुमार सक्सेना के तबादले के विरोध में छात्रों और ग्रामीणों ने धरना देकर स्कूल पर ताला जड़ दिया। ज्ञापन सौंपकर तबादला निरस्त करने की मांग की गई है। सरकार का कहना है कि तबादले प्रशासनिक संतुलन के लिए किए गए हैं।
सारBikaner News: बीकानेर जिले में भाइयों ने बहन के बेटों की शादी में 1 करोड़ 56 लाख रुपये का मायरा भरा, जिसकी चर्चा हर जगह हो रही है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कार्यक्रम में शामिल होकर भाइयों की भावना की सराहना की।
विशेष इनाम, वाराणसी ब्यूरोUpdated Sun, 11 Jan 2026 01:36 AM IST
अर्न सर्वे बांका जिले में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े नहीं, बल्कि संध्या समय भी बेखौफ होकर बड़ी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। शुक्रवार की संध्या बांका टाउन थाना क्षेत्र के कर्मा पंचायत में अपराधियों ने एक सनसनीखेज घटना को अंजाम देते हुए पंचायत के उपमुखिया सह सीएसपी संचालक राजेश कुमार चौधरी पर जानलेवा हमला कर ढाई लाख रुपये नकद लूट लिए। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त है।
विस्तारFollow Usछत्तीसगढ़ की जनजातीय पहचान, लोक संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा उत्सव 'बस्तर पंडुम' इस वर्ष 10 जनवरी 2026 से पूरे उत्साह और गरिमा के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, लोककला, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अनूठा प्रयास है।
इनाम, विस्तारFollow Usराजधानी भोपाल के नगर निगम संचालित स्लॉटर हाउस से जुड़े एक गंभीर मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पशु चिकित्सक के प्रमाणपत्र के आधार पर करीब 26 टन मांस मुंबई भेजा गया था, जिसकी जांच में बाद में गोमांस होने की पुष्टि हुई है। हैरानी की बात यह है कि दस्तावेजों में इसे भैंस का मांस बताया गया था। जानकारी के अनुसार नगर निगम के पशु चिकित्सक द्वारा जारी प्रमाणपत्र के आधार पर मांस को स्लॉटर हाउस से बाहर ले जाने की अनुमति दी गई। दिसंबर 2025 के मध्य में जारी इस प्रमाणपत्र में यह उल्लेख किया गया था कि तय मानकों के अनुसार पशुओं का वध किया गया है और मांस मानव उपभोग के लिए उपयुक्त है। इसी आधार पर मांस को फ्रीज कर कंटेनरों में भरकर मुंबई रवाना किया गया। अब इस मामले में भोपाल नगर निगम की भूमिका ही सवालों के घेरे में हैं।







