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💢कलेक्ट फ्री💢विस्तारFollow Usमाघ मेला क्षेत्र में मुख्य स्नान पर्व पर शहर के बाहर 12 प्रमुख नो-एंट्री प्वाइंट निर्धारित किए गए हैं। जिनमें मंदर मोड़, थाना परेडी गेट, पुलिस चौकी बमरौली, सहसो चौराहा, हबूसा मोड़, सोरांव बाइपास, नवाबगंज बाइपास, मलाक हरहर चौराहा, टीपी नगर कटरा, रामपुर चौराहा, गौहनिया घरपुर और 40 नंबर गुमटी शामिल हैं।
️दैनिक गेट,विस्तारFollow Usजिले में अब शराब माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि जनप्रतिनिधियों को भी जान से मारने की धमकियां देने लगे हैं। हाल ही में जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शराब ठेकेदार ने अनूपपुर विधायक एवं पूर्व मंत्री के पुत्र और जनपद पंचायत उपाध्यक्ष तेजभान सिंह को फोन पर जान से मारने की धमकी दी। इस संबंध में तेजभान सिंह ने भालूमाड़ा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपी ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दिबियापुर/अजीतमल। स्टूडेंट पुलिस एक्सपेरीमेंट लर्निंग कार्यक्रम के तहत शनिवार को अजीतमल और दिबियापुर में विद्यार्थियों को पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली से अवगत कराया। पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ संवाद किया।
साइन अप गेम, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालाघाटPublished by:बालाघाट ब्यूरोUpdated Fri, 31 Oct 2025 04:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बारांPublished by:बारां ब्यूरोUpdated Thu, 08 Jan 2026 06:12 PM IST
पॉइंट्स, अमेठी सिटी। गौरीगंज के पलिया वार्ड में पुलिस लाइन का निर्माण अंतिम दौर में है, जिसके बाद तकनीकी टीम भवनों और संपूर्ण ढांचे की जांच करेगी। अनुमान है कि मार्च के अंतिम सप्ताह में इसका लोकार्पण कराया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस की परेड भी नए परेड ग्राउंड में आयोजित होने की संभावना है।
साइन अप वेरिफाई 73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।
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पुराना कमाई, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ाPublished by:बांसवाड़ा ब्यूरोUpdated Sat, 27 Dec 2025 11:54 AM IST







