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💢शेयर मोबाइल💢विस्तारFollow Usमध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के नावरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत बाकड़ी वन चौकी में तैनात विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) के एक हवलदार की ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। मृतक की पहचान 58 वर्षीय हवलदार कैलाश धुर्वे के रूप में हुई है, जिनकी चार दिन पहले ही छिंदवाड़ा से यहां पदस्थापना हुई थी।
️रिसीव,मुंगेर जिले में जमालपुर थाना क्षेत्र में एक आंगनबाड़ी केंद्र से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है, जहां नाबालिग बच्चियों को अश्लील फिल्में दिखाने के बाद उनके परिवार के सदस्यों पर हमला किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
चरखी दादरी। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन मजबूत इरादों, कड़ी मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य के दम पर यह संभव है। गांव खेड़ी बूरा की प्रिया लाखवान हिमाचल प्रदेश में न्यायिक अधिकारी बनकर युवाओं के लिए मिसाल बनी हैं। वहीं गांव इमलोटा के पहलवान सुजीत कलकल ने अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। गांव बलाली की कुश्ती खिलाड़ी नेहा सांगवान एशिया चैंपियनशिप और वर्ल्ड रैंकिंग सीरीज में पदक जीतकर लगातार आगे बढ़ रही हैं। इनके साथ ही गांव घिकाड़ा के बॉक्सर नवीन झाझडिया ने विश्व मुक्केबाजी कप में कांस्य पदक जीतकर साबित किया कि सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। आज युवा दिवस पर जिले के ये युवा सबके लिए प्रेरणा हैं। इन सभी प्रतिभाओं का एक ही संदेश है कि लक्ष्य तय करें, तुलना से बचें और ईमानदारी से मेहनत करते रहें, सफलता जरूर मिलेगी।
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Donald TrumpIranCivic Pollsसोना-चांदी में ऐतिहासिक उछालबीवी ने मरवा डाला पतिT20 WCRCB vs UPकौन है अरिहा शाह?यूपी में एसआईआरWest Bengal
बीजापुर में कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बड़े बदलाव कर गरीबों के काम करने और मजदूरी पाने के अधिकार को छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और मांग करने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब यह अधिकार समाप्त हो गया है और सरकार की मर्जी से काम मिलेगा।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटनाPublished by:आदित्य आनंदUpdated Tue, 06 Jan 2026 11:07 AM IST
प्रीमियम रिवॉर्ड्स, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:तरुणेंद्र चतुर्वेदीUpdated Sat, 10 Jan 2026 04:59 PM IST
टास्क स्टूडेंट संवाद न्यूज एजेंसी पीडीडीयू नगर। रौबदार कद काठी, भारी आवाज और चेहरे पर ताव देती मूंछे, यही कभी पुलिस की पहचान हुआ करती थी। खास तौर पर मूंछ का पुलिस में विशेष महत्व होता था। मूंछों को मेंटेन करने के लिए विभाग में इसके लिए अलग से भत्ता तक दिया जाता है लेकिन चंदौली जिले में इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही तक एक भी पुलिसकर्मी ऐसा नहीं हो जो मूंछों को ताव देता हो।
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