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️ऑनलाइन वीडियो,73 वर्ष बाद सरगुजा में पहली महिला जनजातीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 20 नवंबर को आगमन होगा। द्रौपदी मुर्मू पहली महिला राष्ट्रपति है जो सरगुजा जिला के अंबिकापुर आएंगी। इसके पूर्व 1952 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद पंडों जनजाति की दशा का प्रत्यक्ष अध्ययन करने पहुंचे थे सरगुजा के पंडों नगर पहुंचे थे। उनकी इस यात्रा की स्मृति में आज भी सरगुजा में देश का एकमात्र ग्रामीण राष्ट्रपति भवन स्मारक मौजूद है।73 वर्ष बाद, सरगुजा एक बार फिर वही गौरवशाली क्षण जीने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अंबिकापुर आगमन को लेकर  उमंग और गर्व का वातावरण निर्मित है।जनजातीय समुदाय इस अवसर को अपने इतिहास और सम्मान से जुड़े नए अध्याय के रूप में देख रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि 1952 ने सरगुजा को राष्ट्रीय पहचान दी थी, और 2025 यह गौरव पुनः स्थापित करेगा।

लाइक अर्न,

अमेठी सिटी। ठंडी पछुआ हवा लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है। इसका सीधा असर जिला अस्पताल की ओपीडी में देखने को मिल रहा है। दो दिनों के अवकाश के बाद सोमवार को खुले जिला अस्पताल की ओपीडी में 1086 मरीज इलाज कराने पहुंचे। इनमें से 631 बुखार के मरीज रहे।

सारमुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे ग्रामीण युवाओं के लिए ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर अटल ज्ञान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। सरकार के दो वर्षों के कार्यकाल के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस जो काम पांच साल में नहीं कर पाई वर्तमान सरकार ने दो साल में कर दिखाया।

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अशोकनगरPublished by:ग्वालियर ब्यूरोUpdated Sat, 28 Jun 2025 11:34 AM IST

ट्रांसफर, सरगुजा जिले में स्थित मां महामाया मंदिर परिसर में नए साल के पहले दिन सोमवार सुबह आग लगने से श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग लगने का कारण भक्तों की लापरवाही बताई जा रही है। मन्नत के धागे और चुनरी में रखे दीपक से आग लगी, जो तेजी से फैल गई। समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे किसी बड़ी घटना को टाल दिया गया।

मोबाइल गेम सूफी संत हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के 814वें सालाना उर्स के अवसर पर शनिवार रात अजमेर स्थित दरगाह शरीफ में परंपरागत सालाना संदल की रस्म पूरे अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। उर्स की शुरुआत से एक दिन पूर्व निभाई जाने वाली इस विशेष रस्म में दरगाह के खादिम समुदाय के साथ देशभर से पहुंचे हजारों जायरीन शामिल हुए।

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