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💢टास्क💢बलिया। जिले में नहरों पर ग्रामीण व किसानों को आने-जाने के लिए पुलियों का निर्माण किया गया है। ऐसे में अधिकांश पुलिया जर्जर होने के कारण हादसे का भय बना रहता है। जिले में नहरों पर कम से कम 500 से अधिक पुलिया गांव के लोगों व किसानों को आने जाने के लिए बनाई गई है।
️विथड्रॉ कलेक्ट,
बलिया। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचन नामावलियों के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजनैतिक दलों को साप्ताहिक रूप से दावे एवं आपत्तियों की सूची उपलब्ध कराए जाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने बताया कि जनपद में मतदाता सूची से कुल 4 लाख 55 हजार नाम हटाए गए हैं। सातों विधानसभा क्षेत्रों में कुल 25,10,595 मतदाता दर्ज हैं, जिनमें से 20,54,620 मतदाताओं की मैपिंग की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि लगभग एक लाख 42 हजार मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल हैं, लेकिन वर्ष 2003 की मतदाता सूची के अनुसार उनके जनपद में निवास का कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी 1 लाख 42 हजार मतदाताओं को नोटिस जारी कर दिया गया है और उनसे मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा गया है। दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 06 फरवरी निर्धारित की गई है। अब तक कुल 3,023 दावे एवं आपत्तियों से संबंधित आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि विशेष पुनरीक्षण के उपरांत मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 06 मार्च को किया जाएगा। इसके अलावा सभी बूथों पर 11 जनवरी को बीएलओ द्वारा मतदाता सूची का वाचन किया जाएगा। जिलाधिकारी ने इस संबंध में की जा रही तैयारियों और व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी भी ली। इस मौके पर एडीएम अनिल कुमार आदि मौजूद थे।
टास्क स्टूडेंट, विस्तारFollow Usमकर संक्रांति पर संगम तट पर 15 जनवरी को आस्था का भव्य नजारा देखने को मिलेगा। मेला प्रशासन ने इस मौके पर दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के संगम स्नान के अनुमान को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। अरैल, झूंसी, संगम क्षेत्र में करीब 24 घाटों पर स्नान की व्यवस्था की गई है। जो श्रद्धालु जिस तरफ से आएगा, उसी के नजदीक घाट पर स्नान कराने की तैयारी की जा रही है।
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1 नवंबर 1983, यह वह ऐतिहासिक दिन था जब राजस्थान के दक्षिणी सिरे पर बसे जनजाति बहुल बांसवाड़ा जिले की तकदीर बदलनी शुरू हुई। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कागदी पिकअप वियर पर बटन दबाकर माही बांध की नहरों में जलप्रवाह शुरू किया, जिसने इस क्षेत्र के जीवन, भूमि और विकास की दिशा ही बदल दी। उस पल के साथ ही बांसवाड़ा का नाम ‘कालापानी’ से निकलकर ‘हराभरा जनपद’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
ऑनलाइन फ्री, अमर उजाला नेटवर्क, बालोदPublished by:राहुल तिवारीUpdated Tue, 30 Dec 2025 04:20 PM IST







