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💢वीआईपी विन💢10 से 14 जनवरी तक सूरत (गुजरात) में सब जूनियर नेशनल खो-खो चैंपियनशिप-2025-26 होगी। इसमें उप्र की टीम की ओर से भदोही की दो बालिकाएं खेलेंगी। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए नगर के कुकरौठी की ज्योति यादव और सेवापुर की लाजो यादव शनिवार को सूरत (गुजरात) रवाना हो गई। चैंपियनशिप में भदोही की दोनों बालिकाओं के चयन की सूचना मिलते ही उनके परिजन खुश हो गए। कोच सुनील कुमार यादव और मंजय यादव ने बताया कि वे कुकरौठी प्राइमरी विद्यालय में प्रतिदिन खो-खो में प्रशिक्षण देते हैं। दोनों बालिकाएं पिछले ढाई वर्ष से नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही थी। दोनों बालिकाओं प्रतिभाशाली हैं। कोच ने बताया कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुकरौठी में ज्योति कक्षा छह और लाजो कक्षा आठ में पढ़ती है। संवाद
️कलेक्ट गेम,
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूलPublished by:बैतूल ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 06:35 PM IST
प्लेटिनम इंस्टेंट, न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपालPublished by:संदीप तिवारीUpdated Wed, 07 Jan 2026 07:38 AM IST
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुरPublished by:अमन कोशलेUpdated Sun, 11 Jan 2026 12:41 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरोUpdated Mon, 12 Jan 2026 02:40 AM IST
मासिक क्लिक, गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 के अवसर पर मध्यप्रदेश सरकार ने जेलों में बंद आजीवन कारावास के बंदियों को बड़ी राहत दी है। जेल विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद कुल 481 आजीवन दंडित बंदियों के मामलों पर विचार किया गया, जिनमें से 87 बंदियों को समयपूर्व रिहाई के लिए पात्र पाया गया है। वहीं, 394 बंदियों को निर्धारित शर्तें पूरी न होने के कारण अपात्र घोषित किया गया है। यह निर्णय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लिया गया है। राज्य सरकार ने अपने पूर्व आदेश के तहत गठित प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक प्रकरण में कानूनी प्रावधानों, बंदियों के आचरण, अपराध की पृष्ठभूमि और अन्य तथ्यों का गहन परीक्षण किया।
रजिस्टर साइन अप 12 साल से फाइलों में कैद बीजापुर बायपास- फोटो : अमर उजाला
विस्तारFollow Usबीजापुर में कांग्रेस नेता विमल सुराना ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) में बड़े बदलाव कर गरीबों के काम करने और मजदूरी पाने के अधिकार को छीनने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों को काम की कानूनी गारंटी थी और मांग करने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध कराना अनिवार्य था। लेकिन अब यह अधिकार समाप्त हो गया है और सरकार की मर्जी से काम मिलेगा।
रिसीव, चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरोUpdated Sat, 10 Jan 2026 06:12 PM IST







