मेगा फ्रेंड्स
साप्ताहिक पॉइंट्स
सुपर सब्सक्राइब, Inc
कैश कलेक्ट
💢गेट ट्रांसफर💢IMD: राजस्थान में बारिश के बाद ठंड ने अचानक तेवर बदल लिए हैं। सीकर, हनुमानगढ़ सहित 10 जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया गया है। शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में सुबह से ही घना कोहरा छाया रहा और सर्द हवाओं के चलते दिन में भी कड़ाके की ठंड महसूस की गई।
️अतिरिक्त लाइक,विस्तारFollow Usजिन मरीजों के दिल में माइट्रल वॉल्व लीकेज होता है, उनके लिए ट्रांसकैथेटर एज-टू-एज रिपेयर (TEER) प्रोसीजर एक बेहतर विकल्प हो सकता है। TEER कम से कम चीरा लगाकर (इनवेसिव) उपचार का तरीका है। यह उन मरीजों के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है, जो माइट्रल वॉल्व लीकेज (Mitral Valve Leakage) के गंभीर मामलों में सर्जरी के लिए उच्च जोखिम वाले माने जाते हैं। यह मौजूदा समय में माइट्रल वॉल्व लीकेज के लिए इलाज की सबसे उन्नत तकनीक मानी जाती है।
अमेठी सिटी। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर दिसंबर में विकास कार्यक्रमों की धीमी प्रगति पर मुख्य विकास अधिकारी सचिन कुमार सिंह ने काम में लापरवाही मिलने पर डीपीआरओ व डीपीओ संग सात जिला स्तरीय अफसरों पर सख्त कार्रवाई की है। प्रगति रिपोर्ट में समाज कल्याण, पंचायती राज, उद्योग, नियोजन, महिला एवं बाल विकास और मत्स्य ने शासन के लक्ष्यों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं किया है।
वॉच स्टूडेंट,
गडवार/चिलकहर। सरकार जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और सुशासन का दावा करते है लेकिर ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हालत यह है कि जन्म प्रमाणपत्र जैसे बुनियादी दस्तावेज़ को बनवाना में लोगों का एक से दो हजार रुपये खर्च करना पड़ रहा है। वहीं, तहसील व ब्लाक चक्कर काटना अलग से हो जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनसे 1000 से लेकर 2000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। कभी सर्वर डाउन, कभी बाबू साहब छुट्टी पर तो कभी दस्तावेज़ अधूरे बताकर वापस कर दिया जाता है। पीड़िता राजकुमारी देवी, ब्रजेश पांडेय, संतोष सिंह, पंकज गुप्ता आदि का कहना है कि दो महीने से दौड़ रहे हैं। हर बार कोई नई कमी निकाल देते हैं। आखिर में साफ़ बोल दिया गया कि 1500 रुपये दे दो, तभी बनेगा।
रिसीव, विस्तारFollow Usराजस्थान प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बालोतरा जिले के गिड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में सामने आ रहे हालात इन दावों की सच्चाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यहां नियमों को ताक पर रखकर मरीजों को सरकारी दवाइयों के बजाय निजी मेडिकल से बाहरी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आरोप है कि यह पूरा खेल कुछ चिकित्सकों और निजी मेडिकल संचालकों की आपसी मिलीभगत से संचालित हो रहा है।
लाइक पैसे गोरखपुर ब्यूरोUpdated Tue, 13 Jan 2026 01:03 AM IST
😊अति सुंदर😎बहुत खूब👌अति उत्तम भाव👍बहुत बढ़िया..🤩लाजवाब🤩बेहतरीन🙌क्या खूब कहा😔बहुत मार्मिक😀वाह! वाह! क्या बात है!🤗शानदार👌गजब🙏छा गये आप👏तालियां✌शाबाश😍जबरदस्त
क्लिक कमेंट,







